Saturday, 26 October 2013

सूरज स्त्री है या पुरुष ? ( Gender of Sun)

डिस्क्लेमर: यह पोस्ट महिला दिवस के उपलक्ष्य में इस दुनिया की समस्त नारीयों  को समर्पित है, तथा अंत में उन्ही नारीयों  के लिए एक सन्देश भी निहित है। अतः कृपया पूरी पोस्ट पढ़े। 
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सूरज, भानु, सूर्य, प्रभाकर, दिनकर, आदित्य, भास्कर, रवि, दिवाकर और आफताब.. …
मैं यहा किसी स्कूल की कक्षा मे हाज़िरी नही ले रहा हूँ, मैं तो सूरज के भिन्न भिन्न नामो का उच्चारण कर रहा हूँ, आपने गौर किया कुछ, जीतने भी नाम है सूरज के सभी पुल्लिंग में है, मतलब सूरज को एक पुरुष की उपाधि दी गयी है, पौराणिक मान्यताओ की भी माने तो सूर्य देव, एक नर ही है|

परंतु मैं सोंच रहा था कि नाम और पौराणिक कथाओ को एक तरफ रख कर सोचे तो सूरज मे पुरुषो के कोई ज़्यादा गुण नज़र नही आते है।
आप बोलोगे की कैसे, तो भाई साब(हांजी, मैं भाईयों से ही कह रहा हूँ) एक बात बताईए जब आप कोई बहुत ही सुंदर, आकर्षक नैन नक्श वाली, भरपूर डील-डौल वाली कोई कन्या को देखते है तो आप अपनी "कूल लॅंग्वेज" मे क्या कहते है ? ....... "Woww she is so hot" अथवा बड़ी हॉट है बे.... ऐसे ही जुमले निकलते है ना आपके मुँह से, अब यह चर्चा फिर कभी करेंगे की लड़कियों के आकर्षण का पैमाना तापमान से कैसे पता चलता है, बहरहाल बात करते है हॉट की, तो आप किसी पुरुष को हॉट नही कहेंगे, कन्या को ही कहेंगे है की नही? तो इस हिसाब से सूरज तो हॉटेस्ट हुआ/हुई, तो यह गुण तो स्त्री का ही हुआ ना।

चलिए एक और उदाहरण लेते है, जब वही अति ताप वाली कन्या मतलब होटेस्ट गर्ल आपके क्षेत्र में , कॉलेज में , ऑफीस में  या पड़ौस में ही रहने वाली है, तो आप उसके चक्कर काटने शुरू कर देते हो, गोल गोल round round , हैं ना भाई साब, सच कह रहा हूँ ना? माफ़ करना अगर बात बुरी लगे तो ।

फिर आपको पता पड़ता है की ऐसे चक्कर काटने वाले आप अकेले नही है और भी भाई लोग है लाइन मे, कोई थोड़ा नज़दीक तो कोई थोड़ा दूर, पर है चक्कर काटने को मजबूर। अब बात करते है सूरज की, इसके आसपास चक्कर काटने वालो की भी कोई कमी नही है, मंगल से लेके शुक्र, गुरु से लेके बुध और शनि से लेके यम, अरुण से लेके वरुण तक सब के सब उस बेचारे / बेचारी सूरज के पीछे नहा धोके या बिना धोये पड़े है।
इसीलिए इन्ही सब पुरुष ग्रहो से तंग आके प्रथ्वी भी सूरज के इर्द-गिर्द होस्टल वॉर्डन की तरह चक्कर काटती रहती है, परंतु बेचारी पृथ्वी के ही पीछे एक दूसरा मजनूँ  "चाँद" पड़ा हुआ है, घूमता रहता है आगे पीछे। 

एक और उदाहरण देखते है, वो अंग्रेजी में कहते है न "लास्ट बट नोट दी लिस्ट" याने की आखिरी उदहरन जो आपको वाकई में सोचने पर मजबूर कर देगा की सूरज पुरुष है या स्त्री , अगर कोई आपको कहे कि जाओ सूरज को एक जैसा निहारो, तो आप क्या करेंगे? हाँ हाँ ऐसा कौन पागल कहेगा की सूरज को निहारो परन्तु मान लो न की अगर ऐसा करना ही पड़े तो आप कैसे करेंगे ? सनग्लासेस  का इस्तेमाल करेंगे और पुरे आत्मविश्वास  के साथ सूरज कि आँखों में याने उसकी किरणो में आँखें डाल के देखेंगे। अब वहींअगरआपको किसी कन्या को देखना हो बिना किसी को पता पड़े  तो "सेम  तो सेम ""   वही सनग्लासेस पहन के भरपूर ताडेंगे । तो सूरज में और कन्या में समानता हुई कि नहीं ?

तो देखा आपने सूरज का नाम सूरज नही सुरजिया बाई होना चाहिए, जो अपने आकर्षण के जाल मे फंसा कर इतने सारे गृहो को अपने आगे पीछे घुमा रहीहै। 

बात यहीं ख़तम नही हुई, माना दसियों गृह सुरजिया के चक्कर काटते फिरते है,  परन्तु मजाल है कि कोई थोडा करीब जाने कि हिम्मत भी कर पाये।  दूर से ही दर्शन करके सुखी है सभी। सुरजिया भी अपनी पूरी चमक लिए रोजाना अपने नियत समय पर घर से निकलती है और नियत समय पर घर पँहुचती है, लाखों करोडो सालो से ऐसा ही चला आ रहा है। सुरजिया कभी डरी नहीं , घबराई  नहीं , सदियों से चक्कर काट रहे गृह भी कभी उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाये ।

  मैं अपनी इस पोस्ट के माध्यम से सभी नारीयों से यही कहना चाहूँगा कि आप भी सूरज कि भांति ही हो, चमकीली और दिशा देने वाली, कहते है इस संसार में राह कि दिशा का ज्ञान सूरज से और जीवन कि दिशा का ज्ञान एक नारी से ही मिलता है। तो इस जगत कि नारी तुम सूरज कि तरह अपने अक्ष पर विराजमान हो, चमको और दिशा निर्धारण करो, परन्तु किसी के दुस्साहस से मत डरो, और अपने भीतर जलने वाली ज्वाला से उसका सर्वनाश करो ।




सूरज सी चमक है तुझमे अगर
तो उसका ताप भी है
  दुःखियों को देख के पिघल जाए, हृदय मे ऐसी नरमी है
तो दूर्जनों  को जला कर भस्म कर दे ऐसी गरमी भी है
हैं नारी तू जननी है, विधाता है, रूप है काली का, चंडी का
  राक्षसो को जलाके कर सकती है तू राख
  तेरी तरफ एक बार भी उठे जो उनकी आँख !!










------चित्र इंटरनेट से साभार 

Wednesday, 23 October 2013

Hindi V/s English



I have not written too many posts on this blog, but whatever I have written mostly are in Hindi language. Recently I got a feedback from few of my friends who told me that they feel it difficult to read Hindi/देवनागरी  Scripts but they can speak and understand Hindi very well. It was not surprising for me because they were amongst the people whose throughout education carried out in English language, and they had an “Only English” atmosphere during their upbringing.


Today we have a large chunk of people who can speak and understand Hindi but they find it hard to read if anything is written in Hindi or in Devnagari script. Reading English novel is also a kind of fashion for today’s generation; I have seen many parents who talk to their children only in English and scold them if they utter a word in native language.
I don’t have any personal enmity with English Language; after all English language plays a big role to earn my bread and butter.

Pheww …. Now philosophy is enough, I come to the point why I do not write much in English? Answer is very simple; I do not know how to write in English. I feel myself helpless when it comes to express feelings.  For example if you want to abuse some one then will you use “F” word or use our treasure of words of Hindi? First question, why do we abuse someone, Kyonki gaali bakne ke siwa uska kuchh ukhaad nahi sakte, right? so to get best feel we always use Hindi swear words. Here my stress is on feelings and not on swear words, so do not be misguided I am talking about feelings only. When you meet your best friend after a long time will you talk to him like “hey dude, where you were for long? Whats up , uhhh? …. No you will not, if you are a real Indian, then you will say “ oye kameene, kahan tha yaar tu, gaayab hi ho gaya ssale”. Here have you noticed the FEEL?

Okay, let’s talk some romantic, here I can understand that those 3 English words are magical and can work, and you don’t need to use a single Hindi word for that, but if you love someone, then instead of saying “I love you”, say it in Hindi “mein tumse bahut pyar karta/karti hoon” and say it with a passionate eye contact, believe me not only you will get the feel but your partner will reciprocate it too.


So again I come to the point, why we can not read Hindi scripts if we can speak, understand and feel in Hindi?


With this post I would like to appeal all readers that Please read and give some time to Hindi as well, Hindi should not be taught in History subject.

नोट : यह पोस्ट हिंदी के प्रसार के लिए विशेष रूप से अंग्रेजी में लिखी गयी है , इस विरोधाबास के लिए क्षमा ॥ 
: Images from Internet

Monday, 21 October 2013

Piclog -2



In addition to Piclog -1, Here I am with second version of my Pics....
Any feedback is welcome!!!



Waiting....

छोटा सा जीवन और लंबा सफ़र है! पा लूँगा हर मंज़िल, साथ तू अगर है!
An All New India in Making..



गगन मे लहराता है भगवा हमारा ।
घिरे घोर घन दासताँ के भयंकर
गवाँ बैठे सर्वस्व आपस में लडकर
बुझे दीप घर-घर हुआ शून्य अंबर
निराशा निशा ने जो डेरा जमाया
ये जयचंद के द्रोह का दुष्ट फल है
जो अब तक अंधेरा सबेरा न आया
मगर घोर तम मे पराजय के गम में विजय की विभा ले
अंधेरे गगन में उषा के वसन दुष्मनो के नयन में
चमकता रहा पूज्य भगवा हमारा.... 
---- अटल बिहारी वाजपयी

I am a leader.... see my following !!!

Handful Devin Happiness.......
                       


Wednesday, 16 October 2013

Happy Queen Elizabeth

This is another story on Governance in India, for last few decades people of India have seen that India’s development graph is not steady and for last 9 years we have seen a steady rise in corruption, crime, inflation and insensitivity of government.

Okay I don’t talk about the government any more and start the story; this is a story of ancient India, when crime rate was not much higher, if someone steals a pair of shoes he used be called a big criminal, if any person stared a women for more than 2 seconds, immediately he was considered to be a big pervert and called a criminal by neighbors and rest of the society. In that era there used to be a person named Jagga, he was a thief by nature and profession, and was considered biggest criminal of that area where he lived.
He used to steal goats and hens and used to cook and eat them without leaving any evidences.
Actually no one could prove that he was the thief so “Panchayat” also used to set him free every time. People of his area hated him; they used to tell their children about Jagga that his is a criminal and not a good human being so do not talk to him.
From Internet

From Internet

Soon Jagga’s son Bhagga also joined him in his business; he was more claver and believed in perfection in his acts. Jagga was very happy that his son is also climbing steps on the same trail where he was leading.
Although Jagga was happy from outside but from inside he was very upset, one evening when he was sitting outside of his house and in the same vicinity children were playing and refraining themselves by coming near to his house by any chance.  That incident shook Jagga from inside, he started staying at home and he became ill and was bedridden.
One morning when Bhagga returned form his usual job with some grains and pair of parrots, he saw his father was counting his last breath. Jagga called his son and told him that now time has come,
 “I will not live now anymore, but before I die I would like to ask a promise from you”, “yes father tell me, I can do whatever you want”
“I was very bad citizen of this locality and was extremely infamous, no one wants to take my name on their tongue, I don’t want to die with this black spot on my name that I am the most evil person of this locality. You have to do something that after my death people do not say that I was worst, they should say that I was good. Then only I will get a sigh of relief in heaven.”
“Yes father, I will do it, I will make your name good”.
Bhagga promised and Jagga died.
Now Jagga was worried, day and night he was thinking that how he can put his father’s name in the good books of the people.
Finally Jagga got an idea and he started stealing each and everything from the house where he entered, if something he can not steal he used to destroy it, he made it sure that when people of that house wake up they were stunned.
Earlier the father-son duo used to steal live stocks of Goats and hens and used to cook them and eat, and leave no traces behind. Now since Bhagga could not eat so much, so he started killing the animals and dumped them in the front of resident’s doors.
Now inhabitants of that locality were dismayed and felt it very painful, since everyone knew that it was Bhagga, but could not produce the evidences so again Bhagga was freed.
Now everybody was heard saying that Bhagga has crossed all the limits, Jagga was even better, Jagga was not that bad man, and he was very good in comparison to Bhagga.
When Bhagga came to know that people are talking like this, he was extremely happy, he kept his promise and now his father’s spirit would be in rest; his father would take a sigh of relief in heaven or hell whatever.

This story ends here. But there is a message lies in the story, what is that?
Do you know, British Government ruled India for almost 200 years and they were very rude and villainous amongst the modern people of India so in 1947 when British government handed over the country’s responsibility to Congress, they took the same promise from Congress’ President which Jagga took from his son.
And you see, today we often say that British-raj was much better than today’s governance.



And you see, Queen of Britain is very happy today …..

Tuesday, 15 October 2013

Piclog-1

Many of my fellow bloggers inspired me to have this piclog......
Piclog can be considered as a synonym of photo blog... I am not a trained photographer, but since creative keeda in mind doesn't sit idle so I also tried my hands on camera.

In the first part of piclog I am sharing some random pics, a couple of which I have clicked in loneliness.




Innocent curiosity 




Speed: Dual core v/s Quad core




Prosperity....Without corruption

Tuesday, 8 October 2013

Golden Jubilee Celebration

Today Gandhi Hall is jam-packed since morning and one can see a sea of people at common ground, one corner of the ground is equipped with decorative bar with varieties of branded drinks, this area is restricted, the other corner is filled with dining tables and one can smell the aroma of delicious food. All these arrangements were done for the VIPs and VVIPs. Common people were sitting on ground, around 20 meters far from this VIP Zone and stage. Mr. Rajeev the MD of “Jaihind” group and elder son of Late Ramesh Chandra ji is very happy today.

India’s top media group “Jaihind” is celebrating their golden jubilee today. This group has started 50 years ago with their Hindi daily news paper “Jaihind Dainik” from New Delhi, when Ramesh Chandra ji started this news paper, no one knew that it would complete not only 50 years but would become one of top media group of India. This group has a strong hold not only in Print but in Electronic media as well. Today they are publishing 2 Hindi, 7 regional, 3 English daily news papers and 3 weekly and one monthly magazine. And if we talk about electronic media then here also they don’t have a lose end, they are numero uno with 6 national news channels and FM network in 9 cities of India on air.

Today a Union Minister is chief guest for this celebration; he will be sharing stage with the CM of state.  It’s 11:40, but minister hasn't arrived yet, although the time given was 10:00 AM, meanwhile on stage we had colorful cultural programs organized by “Jaihind” Media.

Jaihind Group is considered  to be a very loyal media group during each government, they have grown rapidly in recent years, and why not, their tagline says “fast and focused”, and they really are.




All of sudden all people in luxury suits were running here and there, seems minister has arrived, yes Minister jee was walking out of a super-luxury car, surrounded by 4 gunmen, minister jee entered in VVIP zone and disappeared. 

Stage is ready with 7 chairs, now people are coming to fill those empty chairs, the middle one is the bigger one, surely for union minister, adjacent one is for CM, and rest 5 chairs were occupied by senior board members of “Jaihind” along with Mr. Rajeev.

The front 2 rows of VIP zone are filled with some renowned builders and industrialists who were enjoying their share of drinks.

Now a round of garlanding was started, Rajeev jee was holding a garland in both of his hands, all of a sudden he hears some voices from right side of the stage, he saw that some 5-6 farmers gathered their, they wanted to talk to Minister. Rajeev signaled his guards and they took action.

Minister jee now on the podium and started his speech, “Bhaaiyon aur bahano, mein Jaihind ki kitni bhi tareef karu, kam hai, aaj hamara desh jo bhi hai, wo hamari party ki vajah se hai aur isme Jaihind ka bahut bada yogdaan hai, loktantra ke 4 stambho me se ek…..” minister jee stopped when he saw the group of farmers besides his stage, they gathered near stage again and were agitated and asking about their land, they were shouting slogans against a builder siting in front row, they said, hamari jameen wapas karo, hamari jameen wapas karo….

actually few month back, a reputed builder has duped the nearby villager's farmers and captured their precious fertile land at cheaper rates on the name of some government schemes, builder promised them to give a lavish big house to each farmer and now he is not even recognizing them.

Again police force has to intervene and farmers had to be stopped, but minister also concluded his speech soon, and left the stage in haste.

Ashtbuddhi, a local MLA came to farmers and asked them, what they want, farmers said that, we wanted to talk either to CM or to minister; we want to talk about land mafias who illegally captured our farms on the name of Government schemes. MLA heard them and politely said, today minister is very busy and CM is also having important commitments, so they can not hear you. Go and take rest today and come on some other day.

At the same time, in VIP Zone, minister was having chitchat with CM and Mr. Rajeev holding a glass of branded whisky in one hand and a cigarette in another.



Meanwhile on all the Jaihind news channels, anchors were praising Minister’s speech, CM’s work in state and they were running that video in loop where minister praised Jaihind’s contribution towards nation’s development. Anchore said, stay tuned to our channel, we will be back in a minute. 
Then a jingle played the tagline, "you are watching Jaihind News, the fast and Focused...."

Image courtesy: Internet 

Friday, 4 October 2013

रॉयल्टी और राष्ट्रपिता


मित्रो अभी कुछ दीनो पहले खबरें आई थी की जानेमाने लेखक/ गीतकार सलीम साहेब और जावेद अख़्तर ने किसी  फिल्म के निर्माताओ पर मुक़दमा ठोका था की इन्हे कोई लगभग 7 करोड़ रुपये रायल्टी के तौर पर मिलना चाहिए क्योंकि फिल्म तो असलियत मे इन्ही के द्वारा लिखी गयी थी.. ऐसे ही संगीत, साहित्य और कला के क्षेत्र में भी रॉयल्टी का बड़ा महत्व है। 

आखीर यह रायल्टी भी कितने कमाल की चीज़ है, काम आप आज जवानी मे करके जाओ और सठियाने की उमर मे मुनाफ़ा कमाओ और तो और मरने के बाद आपकी पीढ़ियाँ आपके नाम का माल खाएगी| उदाहरण के रूप मे अगर देखे तो अमित कुमार जो की मशहूर गायक अभिनेता  किशोर कुमार के सुपुत्र है, यूँ तो उन्होने कोई ज़्यादा काम नही किया है परंतु आज भी पिताजी के गाए हुए गानो की बदौलत अच्छी ख़ासी रायल्टी कमा रहे है, इतना ही नही आपने थोड़ा बहुत अच्छा काम करके थोड़ा नाम भी कमा लिया और आपकी संतान निकम्मी भी निकली तो भी कुछ ना कुछ तो कमा ही लेगी, उदाहरण अभिषेक बच्चन, उदय चोपड़ा, तुषार कपूर, इत्यादि |

अब इतनी बात चली ही है तो रायल्टी खाने के नाम पे देश मे नंबर 1 परिवार के बारे मे बिना कुछ बोले कैसे रहा जा सकता है, अब जब यह परिवार सत्ता के गलियारे से कोसो दूर है फिर भी हमारी जिह्वा पर इनका नाम तो आ ही जाता है , आपने अब तक अनुमान लगा ही लिया होगा में किसकी बात कर रहा हूँ , जी हाँ ठीक समझे, हमारा "गाँधी" परिवार, 
भाई यह परिवार तो रायल्टी के नाम पे ना जाने क्या क्या खा चूका इस देश मे और अब भी दबे छुपे खाए जा रहा है , 
खैर छोड़िये यहा में ज़्यादा भावुक नही होना चाहता हूँ|

 "गाँधी" और "रायल्टी" से याद आया की जैसे हम तमाम धार्मिक कथाओ, व्रत की कहानियों मे सुनते है की फलाँ फलाँ देवी या देवता ने स्वप्न मे आकर अपने भक्त को कुछ आदेश दिया और आदेश ना मानने के हाल मे उसका सारा राज चौपट होने की भी चेतवानी दी| आज में ईश्वर से यही प्रार्थना करना चाहूँगा की ऐसा ही कुछ आदेश हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी भी आज की सभी पार्टी के सभी नेताओ, मंत्रियों, प्रधानमंत्री, और सभी MPs तथा  MLAs (जीते हुए और हारे हुए )को भी स्वप्न मे आके दे |

इन सभी भ्रष्ट नेताओं को स्वप्न मे बापू आके कहे की आप लोग मेरी फोटो का उपयोग सालो से कर रहे हो, इसके एवज मे रायल्टी के नाम पे एक फूटी कौड़ी तक नही दी है आज तक तुमने, सबसे पहले तो मेरी फोटो मुझसे बगैर पूछे "रुपये"   के हर नोट पर छापी गयी फिर ऐसे लाखो करोड़ो के नोट तुम लोगो ने अपने जेबो मे भर लिए, फिर मेरे नाम का दुरुपयोग किया यह कह कर की गाँधी की "हरी पत्ती" के बगैर तुम कोई काम नही करोगे, मेरे नाम पर हर पार्टी के नेता ने वोट मांगे , इन सब बातो के लिए जुर्माना नही माँग रहा हूँ, में बस यह कहना चाहता हूँ की कॉपीराईट एक्ट के तहत मुझे इसकी रायल्टी मिलनी चाहिए और जैसा की इस देश मे होता आया है बाप के गुजर जाने के बाद रायल्टी उसकी संतान को मिलती है वैसे ही अब यह सारी रायल्टी की रकम तुम लोग पूरे देश मे बाँटोगे, क्योंकि क़ानूनन मे पूरे देश का बाप हूँ, में राष्ट्रपिता हूँ|




सोचिए अगर ऐसा हो जाए और यह लोग बापू की बात मान ले  और हर नोट पर छपी बापू की फोटो के लिए उस नोट की कीमत का २% भी रायल्टी के रूप मे देदे तो भी अपना देश तो सुखी हो जाए......

में तो हिसाब लगा रहा हूँ की मेरे हिस्से मे कितना आएगा, आप भी लगा लो |


--------------------------------------------------------------------------चित्र इंटरनेट के सौजन्य से