Friday, 2 June 2017

सुखी और सफल वैवाहिक जीवन के आधुनिक नुस्ख़े -1

सुखी और सफल वैवाहिक जीवन के आधुनिक नुस्ख़े

 अरे आप हंस क्यों रहे हो ? चुटकुला नहीं है। ऐसा होता है। वैसे सफल वैवाहिक जीवन होना अलग बात है, सुखी वैवाहिक जीवन होना दूसरी बात है और एक सुखी प्लस सफल का कॉम्बो वैवाहिक जीवन सबसे बड़ी बात है जो शायद आपको फिक्शनल सी लगे। लेकिन यकीन मानो सुखी, सफ़ल और ऊपर से वैवाहिक, ऐसा जीवन होता है इसी धरती पर होता है। झूट बोलू तो काला कुत्ता काटे (कुत्ता इसलिए क्योंकि काले कौवे आजकल हमारी लोकैलिटी में नहीं मिलते, वो पुराने लोग कहते है न कि  कौवा बोले तो अतिथि आ जाते है, इसीलिए अतिथियों के भय से हमने कौवो को मार भगाया, और अपने अपने घरो में कुत्ते पाल लिए है। )

 मुद्दे पर आते है, तो जनाब जिनका कट चूका है मतलब विवाह हो चूका है वो लोग ध्यान और मन लगा के पढ़िए और वो जिनकी बुद्धि अब तक सही सलामत है वो तो अवश्य पढ़े। अविवाहित इंसान सदैव ऐसा नहीं रहने वाला, क्योंकि किसी ने कहा है कि भारत में मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जो विकासशील हो न हो विवाहशील जरूर है । आप कितने ही अच्छे तैराक क्यों न हो विवाह रूपी दरिया में आपने डूब ही जाना है एक दिन।

पुरातन काल में तो हमारे पूर्वजो ने जैसे तैसे अपने जीवन को सुखी और सफल बना लिया था किन्तु मॉडर्न युग में आपको अगर एक सुखी और सफल वैवाहिक जीवन जीने की कला सीखनी है तो अपने आसपास गौर से देखना शुरू कीजिये।

हमने भी अपने आसपास की चीजों का थोड़ा अध्ययन किया और गूढ़ रहस्य का पता पड़ा की सोशल मीडिया वाले आधुनिक काल में स्वयं के चुने हुए शत्रु के साथ कैसे जीवन बिताया जाये। जी हाँ दोस्तों, मैंने  हाल ही में जाना कि सोशल मिडिया के जरिये आप सिर्फ सरकार ही नहीं चला सकते अपितु घर गृहस्थी और परिवार भी चला सकते है।

कैसे ?

निम्नलिखित बिंदुओं को पढ़े और आत्मसात करे। आज सोशल मीडिया का जमाना है उसका भरपूर उपयोग ही आपको बैकुंठ धाम का सुख देगा।

१. बीवी को कभी भी फेस-टू -फेस हैप्पी बर्थडे न बोले, बल्कि फेसबुक पर एक घटिया से शायर की चुराई हुयी तुकबंदी के साथ जन्मदिन की शुभकामनायें दें। (इसके लिए मुझे संपर्क करे, हाथोहाथ तुकबंदी करके देंगे वाज़िब दाम पर) अपनी फेसबुक पोस्ट में बताएं दुनिया को की आप कितने खुशनसीब है जो आपको ऐसी (ऐसी मतलब, वो जैसी है वैसे नहीं लिखना है उसका उलट बहुत तारीफों के साथ लिखना है ) बीवी मिली है। खबरदार जो अगर आपने यहाँ सच का एक बूँद भी लिखा, तो बे-मौत मारे जाओगे। (इसकी जिम्मेदारी हम नहीं लेंगे)

२. जन्मदिन पर आप उसके कुछ पुराने अच्छे से (फ़िल्टर और मेकअप वाले ) फोटोज़ भी पोस्ट कर सकते है। यहाँ भी  यह ध्यान रहे की कोई ऐसा फोटो गलती से भी न पोस्ट हो जाये जिसमे फ़िल्टर न लगा हो या बिना मेकअप वाला फोटो हो।अगर आपसे ऐसा कुछ हो जाता है तो एम्बुलेंस को एडवांस में फ़ोन करके रखिये।


३. अच्छा, आपको उसके अच्छे फोटोज नहीं मिल रहे है तो बढ़िया मौका है रिश्ते को मजबूत करने का, तुरंत एक DSLR खरीद डालिये, ऑटो मोड में बीवी के धड़ाधड़ फोटोज निकालिये। जहाँ भी आप जाइये कैमरा लेकर जाइये। और इन फोटोज को अच्छे से डबल प्रोसेस करके बीवी को कहिये अपलोड करे। फिर आप अपने आप को टैग करे और फोटोज पर होने वाली लाइक्स का हाफ सेंचुरी, सेंचुरी, डबल सेंटरी इत्यादि सेलिब्रेट जरूर करे।

४ . बीवी के द्वारा शेयर की हुयी हर पोस्ट को Like करे खासकर वो वाली पोस्ट्स जिसमे वो बता रही है की पिछले जनम में भी उसके पति आप थे, या उसके लिए सबसे अच्छा शहर पेरिस है, या उसकी शकल किसी सेलिब्रिटी से मिलती है या वो इस दुनिया में क्यों आयी है । इन सब पोस्ट्स को बराबर like करिये। क्योंकि इनमे वो आपको already टैग तो कर ही चुकी है ।

५ . जब भी कोई फ़िल्म देखने जाओ या किसी मॉल में तफरी ही करने जाओ तो फेसबुक पर चेक-इन करना न भूलें , और हाँ उस चेक-इन में अपनी बीवी को टैग करना तो कतई न भूलें। बता रहा हूँ ये सबसे लोकप्रिय नुस्खा है सामंजस्य बैठाने का।


६ . आप भले ही ५ स्टार होटल या किसी लक्ज़री रेस्टारेंट के बाजू में खड़े होकर पानीपुरी खा रहे हो लकिन फेसबुक पर चेक इन होटल या रेस्टॉरेंट का ही करे।

७ . बजट निकाल के हर साल विदेश नहीं तो कम से कम मनाली, नार्थ-ईस्ट इत्यादि जगहों पर जाकर ढेरो फोटो खिचवा के आये। ज्यादा कहीं नहीं तो महाबलेश्वर या गोवा ही चले जाये। फिर उन फोटोज को साल भर एक एक करके चिपकाते रहिये with the tagline "Golden memories" . ये बहुत प्रभावित करने वाला नुस्खा है।
(लोगो को नहीं अपनी घरवाली को प्रभावित करने वाला नुस्खा )

अरे अरे रुकिए अभी आपके दिमाग में सवाल आया होगा बीवी को हर जगह टैग करके वो खुश कैसे होगी ? तो जनाब  ऐसा है कि बीवी को जब आप ऐसी सुहानी, रोमांटिक और महँगी घटनाओ पर टैग करते हो तो वो वो मैसेज जाता है बीवी की सहेलियों को। और यही तो आपकी बीवी चाहती है।
और वो इतना ही नहीं चाहती, वो यह भी चाहती है की उसके साथ आपकी मुस्कुराती हुयी फोटो लगाने से आपकी भी सखियों तक मैसेज पहुंचे कि आप अपनी बीवी के साथ कितने खुश है।

८  .अगली बात , अपने ज़ेहन में २ तारीखें परमानेंट मार्कर से गोद के रखे एक तो बीवी का जन्मदिन और दूसरा खुद का बलिदान दिवस (शादी की सालगिरह) . जैसे ही सालगिरह आये वैसे ही फिर वही, एक अच्छा सा दार्शनिक सा पोस्ट डाले और अपनी अर्धांगिनी को सालगिरह विश करें। ( फेसबुक पर ही )

 
९  . जब भी आप कुछ महंगा सामान खरीदें खुद के पैसो से खुद के लिए, तो उसको ख़ुशी ख़ुशी इस्तेमाल करने के लिए पहले फेसबुक पर डिक्लेअर करे की यह खूबसूरत तोहफा आपको आपकी beloved wife ने दिया है और आप उसके शुक्रगुजार है। उसको फेसबुक पर ही थैंक यू भी कहें। यह बात हर चीज पर लागू होती है, जी हाँ आप कच्छे बनियान तौलिये को भी गिफ्ट डिक्लेअर कर सकते है।

१०  .  अंतिम बात ,आप अगर राजनीती, खेलकूद, वैश्विक समस्याएं, सामाजिक कुरीतियों या टेक्नोलॉजी से जुडी कोई पोस्ट कर रहे है तो गलती से भी उसमे अपनी बीवी को टैग न करे।  ये सारी बातें एलर्जिक हो सकती है और आप को इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते है। लेकिन अगर आप बॉलीवुड या टीवी जगत से जुडी कुछ बात शेयर कर रहे है तो पक्का टैग करे।

और हाँ सबसे बड़ी बात, ये नुस्खे वाली बात अपनी बीवी को कतई न बताये, मेरा नाम लेकर तो बिलकुल नहीं। प्लीज हाथ जोड़कर विनती है।

अभी के लिए इन १० बातो पर अमल करिये, तब तक मैं कुछ और नुस्खे खोज के लाता हूँ।

मजा आये या न आये मेरी इस पोस्ट को लाइक जरूर करना सिर्फ यह जताने के लिए की आप एक भले मानस है। नहीं किया तो काला कुत्ता पीछे पड़ जाये

Thursday, 4 August 2016

दिल्ली की सैर



भारत में लोग-बाग अपने फेवरेट सितारों से मिलने बम्बई जाते है, एक झलक पाने को घंटो हजारो की भीड़ में खड़े रहते है। कुछ बावले लोग तो चुपके से सितारों के घरो में घुस तक जाते है और आराम से घूम-घाम के सकुशल लौट भी आते है। अभी हाल ही में एक भाईसाब ने पुरे ९ घंटे अमिताभ बच्चन के घर में गुजारे वो भी बगैर किसी को भनक लगे।
जब मैंने ये ख़बर पढ़ी तो सोचा की क्यों न मैं भी अपने पसंदीदा मनोरंजक सितारों के दर्शन के लिए उनके घर में घुसपैठ करूँ ? बस यही सोच के मैंने प्लान बनाया दिल्ली सैर का। अजी हाँ मेरा मनोरंजन करने वाले सभी सितारे दिल्ली में ही रहते है।


तो भाईसाब हम पंहुचे दिल्ली और सबसे पहले घुसे अपने नंबर १ मनोरंजक सितारे के बैडरूम में। इस सुपरस्टार को लोग प्यार से पप्पू बुलाते है। ये एक बहुत बड़े खानदान के वारिस है। जैसे ही छुपते -छुपाते इनके घर में दाखिल हुए तो हमने देखा की कमरे के एक कोने में कुछ बुझी हुयी चिलम पड़ी थी, सेंटर टेबल पर कुछ क्रेडिट कार्ड्स और कोई सफ़ेद पाउडर बिखरा पड़ा था टीवी पर फुल वॉल्यूम में डोरीमोन का कार्टून चल रहा था, थोड़ा और नज़र को इधर उधर दौड़ाया तो पाया की ये जनाब अपने पुरे घर में फ़ोन लेकर दौड़ लगा रहे थे। थोड़ा और नज़दीक से जानने की कोशिश की तो हमने पाया की ये तो पोकेमोन-गो नामक मोबाइल गेम खेल रहे थे वो भी घर के अंदर क्योंकि मम्मी ने बाहर जाने से मना किया है। बड़ा अच्छा लगा इन्हें इतना नज़दीक से देखकर। जैसे बाल-गोपाल की कलाएं देखकर गोकुलवासियों का मन मोहित होता होगा बिलकुल वैसे ही हम बाबा को देखकर मोहित होते रहे।

वहाँ से निकल कर फिर हम घुसे ७-रेसकोर्स रोड वाले बंगले में, यकीन मानिये बड़ी आराम से घुस गए यहाँ भी। रात हो चुकी थी और इसी अँधेरे का फायदा उठा कर हम नमो जी के कमरे में घुस गए। ये चमकती सफ़ेद दाढ़ी क्या खूब चांदनी बिखेर रही थी। वो अपनी कुर्सी पर बैठकर कोई किताब बांच रहे थे , शीर्षक थोड़ी देर तक तो नहीं देख पाया अंग्रेजी में था किन्तु थोड़ी मशक्कत के बाद पता चल ही गया उनकी किताब का नाम -Gulliver's Travels था। उनके कमरे की दिवार पर दुनिया का नक्शा टंगा हुआ था और लगभग आधे नक़्शे पर हरे और लाल रंग के पिन घुसे हुए थे। शायद ये पिन इंगित कर रहे थे कि नक़्शे की ये जगहें जहाँ जहाँ पिन लगी थी सारी नमोजी की चरणधूलि पाके धन्य हो चुकी थी। किन्तु लाल और हरे का मतलब क्या हुआ भला? एक लाल पिन हमारे प्रिय पडौसी देश के सीने पर भी घुसी हुयी थी। ओह मतलब समझा हरी पिन मतलब जहाँ आमंत्रण पर पधारे थे और लाल पिन मतलब जहाँ जाके नमोजी ने कहा था "सरप्राईज़ ". . .
बस अब इतनी संवेदनशील जगह पर ज्यादा समय नहीं बिता सकता था तो चुपचाप मैं वहां से कूच कर गया।

अगला और अंतिम पड़ाव था भारत के सबसे ज्यादा चर्चित और चहेते CM का घर। प्यार से इनको भी कईं नाम दिए गए है परंतु इन्हें किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। पहले धरने-आंदोलनों से और फिर ट्विटर के माध्यम से ये कईं लोगो का मनोरंजन करते आ रहे है। रात हो चुकी थी मैं गलती से इनके बैडरूम में दाखिल हो गया था सो डर और शर्म के मारे इनके बेड के नीचे जाके घुस गया था। तभी भाईसाब और भाभी जी आये मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था की यहाँ से कैसे निकलूँ इसलिए चुपचाप वहीं इनके सोने का इंतजार करता रहा। अब आपको पता ही है कि किसी दंपत्ति के बैडरूम चुपके से उनकी बातें सुनना जुर्म है और उन बातो को फिर ज़माने को बताना तो घोर अपराध है। किन्तु लाख कोशिशो के बावज़ूद मैं खुद को रोक नहीं पाया, न सुनने से न ही सुनाने से। तो सुनिये :
मैडम : कितने दिन हो गए आपने रोमांस तो क्या रोमांटिक बातें भी नहीं करी मुझसे। कितने साल हो गए आप मुझे फिल्म दिखाने भी नहीं ले गए हर बार उस मुए मनीष को ले जाते हो। आखिर कब तक चलेगा ऐसा ?
भाई साहब खांसते हुए और मफलर को उतार के साइड में रखते हुए बोले : जानू मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ ये मुझे ट्वीट करके बताने की जरुरत नहीं। मैं तुम्हे डेट पे ले जाना चाहता हूँ, बच्चो को पिकनिक पे ले जाना चाहता हूँ, तुम्हे फिर से पहले जैसा रोमांस करना चाहता हूँ पर क्या करूँ ? मुझे मोदीजी ये सब करने ही नहीं देते।

इतने में मेरी आँख लग गयी और जब खुली तो खुद को अपने कमरे में स्वयं के बिस्तर पर पाया। धत्त तेरे की ये दिल्ली की मनमोहक सैर तो एक स्वप्नदोष निकल गया मेरा मतलब दोषपूर्ण स्वप्न निकल गया।

 नोट: चित्र गूगल इमेज सर्च के सौजन्य से

Tuesday, 14 June 2016

पहली बारिश



बारिश की पहली बौछार, बिजली की चमकार, मिट्टी की सौंधी महक और पहला -पहला प्यार। अरे अरे आप तो रोमांटिक होने लगे , रुकिए तो सही। श्रृंगार रस  से भरी ये बातें अब जवानी में अच्छी लगती है किन्तु बचपन में तो इन सबके मायने अलग ही हुआ करते थे।

वैसे तो इस पहली बारिश के मायने धरती पर निवास करने वाली हर प्रजाति के हर उम्र, लिंग, और व्यवसाय के हिसाब से अलग अलग हो सकते है। परन्तु मैँ आज संक्षिप्त में बचपन की ही बात करूँगा।

जून का आधा महीना बीत जाने के बाद जैसे ही मौसम सुहाना होने लगता, बादलों का झुण्ड आवारागर्दी करते हुए बरसने को बेचैन होता, बिजलियाँ लूप-झूप करने लगती वैसे ही हमारे दिलो की धड़कने बढ़ने लगतीं थी। यहाँ धड़कनो का ताल्लुक कतई रोमांटिक भावनाओ से नहीं है।  ये पहली बारिश संकेत होती थी गर्मी की छुट्टियां ख़त्म होने का, ये कड़कती बिजलियाँ कहती थी बंद करो ये क्रिकेट और गरजते बादल संदेसा लाते थे की अब स्कूल शुरू होने को है,और इसीलिए तेज़ होती थी धड़कने।



हर इंसान को ईश्वर का वरदान होता है की जो चीज वो टाल नहीं सकता उसके साथ ताल-मेल बैठा ही लेता है। फिर चाहे वो शादी हो, नौकरी हो या स्कूल। इसी प्रकार छुट्टियों का खत्म होना, स्कूल का खुलना और पढ़ाई का शुरू होना वो घटनाएँ थी जिन्हे टाला नहीं जा सकता था। इसलिए इन सब के साथ ताल-मेल बैठाया जाता था इस लालच के साथ की अब सब कुछ नया नया होने को है। नयी क्लास, नयी किताबें, नया बस्ता ( स्कूल बैग) नयी यूनिफार्म और भी कईं चीजे।

तब मिट्टी की खुशबू से ज्यादा अच्छी लगती थी नयी किताबों की महक, जिस प्रकार पहली पहली बूंदे सुखी पड़ी जमीन को भिगोती थी उसी प्रकार नयी-नयी पेंसिल से कोरी कोरी नोटबुक पर नाम लिखा जाता था। 
नाम -> प्रितेश दुबे 
विषय -> हिंदी 
कक्षा ->४ थी 
 जैसे पहली बारिश धरती को धानी चुनर से ढँक देती थी उसी प्रकार हम अपनी किताबो को भूरे कवर से ढंका करते थे। स्कूल खुलने के समय की खरीदी किसी शादी ब्याह की शॉपिंग से कम न होती थी। घर का माहौल स्कूलमय हो जाया करता था। पापा किताबो पर कवर चढ़ाते और माँ यूनिफार्म की फिटिंग सही करती। और हम अपने नए बस्ते को ज़माने में व्यस्त रहते। 
और हाँ WWF के पहलवानो वाले, डिज़्नी के कार्टून वाले और क्रिकेटर्स के फोटो वाले स्टिकर्स का तो बोलना भूल ही गया। 

ऐसा नहीं है की पहली बारिश सिर्फ हमारी धड़कने तेज़ करती थी बल्कि पापा को भी मन ही मन परेशान करती थी। स्कूल खुलने पर हमारा नया बस्ता तो नयी किताबो-कॉपियों से भर जाता था परन्तु शायद उनका बस्ता (बटुआ)खाली हो जाया करता था। जो चीज टाली  नहीं जा सकती उसके साथ ताल-मेल बिठाना भी तो उन्होंने ही सिखाया था तो वो भी इस परिस्थिति से ताल-मेल बैठा ही लेते थे हर बार। 

बारिश तब भी आती थी, बारिश अब भी आती है। स्कूल तब भी खुलते थे, स्कूल अब भी खुलते है। पापाओं की जेब तब भी खाली होती थी और अब भी खाली होती है। सब कुछ वैसा का वैसा है सिवाए बचपन के। बचपन अब वैसा नहीं रहा।



Thursday, 14 April 2016

बाबा साहेब आंबेडकर

बाबा साहेब आंबेडकर की १२6 वीं  जयंती मनाई जा रही है और बड़े धूमधाम से ही मनाई जा रही है। पिछले कुछ दिनों से चंदा उगाही का कारोबार भी चल रहा है। हमारे देश में कोई भी महोत्सव चाहे वो धार्मिक हो, राजनैतिक हो या सामाजिक हो उसकी तैयारी बड़े जोरो शोरो से होती है। "जोर" लगा लगा के चन्दा उगाया जाता और फिर उस चंदे से हाई वोल्टेज DJ वाले बाबुओं से "शोर" करवाया जाता है। ऐसा अमूमन सभी प्रमुख महोत्सवों के दौरान होता है। (सभी मतलब सभी)

हाँ तो हम बात कर रहे थे बाबासाहेब आंबेडकर की १२6 वीं  जयंती की तो सभी राजनैतिक दल, सामाजिक कार्यकर्ता, और दलितों के, पिछड़ो के मसीहा लोग आज के दिन अपने वातानुकूलित ऐशो -आराम छोड़ के १-२ जगह भाषण देंगे, पिछली, मौजूदा और आने वाली सभी सरकारों को गरियाएंगे और घर जाके २-४ पेग मार के सो जायेंगे। ऐसा ही होता आया है बरसो से।



बरसो से हम सब के मन में राजनैतिक दलों ने बाबासाहेब की एक छवि बना दी है की वो दलित नेता थे। बाबासाहेब का योगदान सिर्फ दलितों के उत्थान के लिए ही सिमित था। हमारी भी स्कूली किताबो ने हमे ज्यादा कुछ नहीं पढ़ाया बाबासाहेब के बारे में सिवाए इसके की वो हमारे संविधान के निर्माता थे।

बाबासाहेब आंबेडकर को इतना "सेलिब्रेट" करने वाले भी उनके कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण योगदानों के बारे में शायद ही जानते होंगे। आइए आपको बताता हूँ की "भारत के आज़ाद होने के बाद" बाबासाहेब का क्या क्या योगदान रहा है देश के लिए। (जो वाक्य बोल्ड और रेखांकित है उसका महत्त्व भी आप समझेंगे लेख के अंत में ).

१. RBI को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है, इसकी परिकल्पना बाबासाहेब ने की थी।

२. भारतीय वित्त आयोग जो की भारतीय राज्यों और केंद्र के बिच वित्त प्रबंधन की प्रमुख कड़ी है का गठन भी बाबासाहेब के प्रयासों से हुआ था।

३. संविधान में "हिन्दू कोड बिल" को कानूनी दर्जा दिलाने की जद्दोजहद भी आंबेडकर ने की थी, इस बिल का मकसद महिला सशक्तिकरण, सती प्रथा और दहेज़ प्रथा का उन्मूलन था। अगर यह बिल पास हो जाता तो १९५१ से ही असल "Women Empowerment" की शुरुआत हो जाती। परन्तु ऐसा हो नहीं पाया और २०१४ में राहुल गांधी को "Women Empowerment" शब्द के रट्टे लगाने पड़े।

४. श्रम मंत्री रहते हुए उन्होंने आधिकारिक कामकाज के घंटो को १२ से घटवा के ८ करवाया। (आईटी वालो को तो अब तक अपने बाबासाहेब का इंतजार है )

५. कश्मीर में आर्टिकल ३७०, जिसके बूते पर कईं सरकारे आई और गयी।  इसी आर्टिकल ३७० को पूरी तरह से नकारने का साहस भी बाबासाहेब ने दिखाया था। उन्होंने कश्मीरियों से कहा था की आप चाहते हो की आपकी सीमा सुरक्षा हम करे, आपको आर्थिक सहायता हम दे , आपको आपदा सहायता हम प्रदान करे और आप हमारे कानून नहीं मानेंगे , ऐसा कैसे हो सकता है ? ( हम मतलब भारत सरकार)
किन्तु आज बाबासाहेब के कईं अनुयायी JNU में आर्टिकल ३७० की वकालत करते है और कश्मीर की आज़ादी का बीड़ा उठाये है।

६. नेशनल पावर ग्रिड, राष्ट्रीय सिंचाई योजना जैसी कईं परियोजनाओं को क्रियान्वित करने में योगदान।
७. बौद्ध धर्म की परिस्थापना और
८. भारत के कईं राष्ट्रिय चिन्हों पर बौद्ध धर्म की छाप भी इन्ही के प्रयासों का परिणाम है।

और भी कईं चीजे मेरी व्यक्तिगत जानकारी के आभाव में छूट गयी है , किन्तु इतनी काफी है इस बात के प्रमाण के लिए की आधुनिक भारत की नींव रखने में उनका अच्छा ख़ासा योगदान रहा है। जिसे राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पिछली सरकारों ने प्रचारित नहीं किया।

उनके इन योगदानों को शायद कोई याद भी नहीं करना चाहता, क्योंकि ये पुरे देश के हित में थे। आजकल देश-हित  की बात करने वालो को "सूडो नेशनलिस्ट", "भक्त" या "संघी" कहा जाता है। और अगर बाबासाहेब के इन सभी योगदानों का जिक्र हो गया तो हंगामा खड़ा हो जायेगा। इसीलिए आजतक उन्हें सिर्फ और सिर्फ संविधान निर्माता और दलितों का नेता ही कहा जाता है।

अब चलते चलते आपको उस बोल्ड और रेखांकित वाक्य के बारे में भी कुछ जानकारी दे देते है। उनके उपरोक्त  सभी योगदान भारत के आज़ाद होने के बाद के थे जब उन्हें संवैधानिक ओहदा प्राप्त हुआ था। आज़ादी के पहले की उनकी सारी लड़ाई दलितों के उत्थान के लिए थी। यहाँ अगर कहा जाये कि उनकी लड़ाई अंग्रेजो के खिलाफ डायरेक्ट कभी नहीं रही तो भी असत्य नहीं होगा । उन्होंने अंग्रेजो से भी हाथ मिलाया था ताकि दलितों को अधिकार मिल सके। उन्हें कुछ हद तक कोई सरोकार नहीं था की देश में सरकार किसकी है। उनकी प्राथमिकता में सिर्फ पिछड़ो को आगे लाना था। कुछ एक मुद्दों पर वो गांधीजी के विरूद्ध भी खड़े हुए थे। उन्ही के प्रभाव के चलते आज़ादी के आंदोलन में दलितों का संगठित योगदान उतना अहम नहीं रहा है जितना हो सकता था।

और जहाँ तक रही बात दलितों के लिए काम करने की तो वो जरूर उन्होंने किया किन्तु अकेले उन्होंने किया ऐसा भी नहीं है। जातीप्रथा के खिलाफ अभियान और कईं रूढ़ियों को खत्म करने के लिए प्रमुख कदम उठाने वालो में जो नाम आते है वो राजाराममोहन राय, रबिन्द्र नाथ टैगोर, केशब चन्द्र सेन जैसे लोग है जो की ब्राह्मण थे। इनके अलावा बॉम्बे प्रार्थना समाज, आर्य समाज, सत्य साधक समाज इत्यादि ने भी सर्व कल्याण और मनुष्यो में समभाव  के लिए काम किया। बाबासाहेब ने एक वोटबैंक जरूर खड़ा किया और आज कईं राजनैतिक पार्टियां उसी वोटबैंक के लालच में "दलित-दलित " चिल्लाती फिर रही है।  आज शायद बाबासाहेब अपनी आँखों से यह सब देख रहे होते तो शायद उन्हें थोड़ा दुःख जरूर पहुँचता।

अगर हमारे पुरखो ने जाती प्रथा का प्रचलन शुरू किया और मनुष्यो को उनके कार्य के अनुसार विभाजित किया तो "Social Equality" की बात करने वाले लोगो ने इन्ही मनुष्यो के बिच बैर और घृणा को जन्म दिया। यह सामाजिक विभाजन अब इतना बढ़ चूका है की हम देश हित के बारे में अब भी नहीं सोच रहे है। अब भी हम सिर्फ हमारी जाती, हमारा धर्म, हमारा समाज इन्ही घेरो में अटके है।

हमारा देश तेज़ी से आगे तो बढ़ा है किन्तु ट्रेडमिल के ऊपर। सालो तक  भागने के बाद उतरे तो पाया की हम तो वहीं खड़े है।


नोट: इस लेख का उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहात करने का कतई नहीं है। हम बाबासाहेब आंबेडकर के कार्यो के लिए उनका भरपूर सम्मान करते है। किन्तु उनके नाम का दुरुपयोग करने वालो के सख्त विरुद्ध है। जिस प्रकार गांधी जी के नाम का भरपूर दुरूपयोग होता आया है वैसा ही कुछ लोग आंबेडकर के साथ करने जा रहे है।
फिर भी दिमाग की जगह अगर किसी का दिल दुखा हो तो लिखित में क्षमा चाहता हूँ और आशा करता हूँ की इस लेख के विरोध में कहीं आग-जनि, बंद या पत्थरबाजी नहीं होगी। धन्यवाद।

Saturday, 27 February 2016

भारत की युवाशक्ति


जब से सत्ता संभाली है तभी से हमारे प्रधानमंत्री जी ने दुनियाभर में ढिंढोरा पिट रखा है कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। भारत का युवा दुनिया बदलने की ताकत रखता है। सारी दुनिया हमारे देश की ओर आशाभरी दृष्टि से देख रही है। और भी न जाने कितनी बातें कही है हमारे प्रधानमंत्री ने हमारी युवा शक्ति के बारे में।

किन्तु बेचारे मोदी जी यह जानने में शायद असफल रहे है की असल में उनकी तथाकथित महान युवा शक्ति कर क्या रही है। हमारे देश में आज की तारिख में मोटे-मोटे तौर पर ५ प्रकार की युवाशक्ति पायी जाती है। मोटे तौर पर इस लिए विभाजित किया क्योंकि इन्ही ५ श्रेणी के युवा तय कर सकते है की देश को किस दिशा में लेके जाना है।

आईये आपको हम बताते है उस युवाशक्ति के बारे में, मोदी जी जिसका प्रचार प्रसार समस्त विश्व में कर रहे है ।

१. बुद्धिजीवी युवाशक्ति :
ये वो युवाशक्ति है जो अपने आपको "रॅशनल" कहते है और हर प्रकार के रूढ़िवादी विश्वास पर प्रश्न करते है। इसी कड़ी में कईं बार वो भूल जाते है की देश का इतिहास क्या रहा है। भूल जाते है की कुछ विश्वास इतने अटल होते है की तथ्यों से परे होते है। ये वो युवा है जिन्हे अपने "ईश्वर" से  ज्यादा भरोसा अपनी बुद्धिमता पर है। यहाँ तक तो सब कुछ अच्छा है, आपको सब ठीक लग रहा होगा। किन्तु यही वो युवा है जो बड़ी आसानी से बहकावे में आता है। यही वो युवा है जो गरीबो के लिए लड़ते लड़ते अचानक से आतंकवादियों के लिए मोर्चा लिया खड़ा पाया जाता है। इस युवाशक्ति के लिए अफजलगुरु और याकूब मेमन जैसे लोग हीरो हो जाते है।यही वो युवा है जो कलम छोड़ कर बन्दूक उठाने की बात करता है। यही वो युवा है जो अंधभक्ति पर सवाल उठाते उठाते देशभक्ति भूल जाता है। यही वो युवा है जो दक्षिणपंथ (राइट विंग) का विरोध करते करते देश का ही विरोध करने लग जाता है।सामंतवाद से लड़ते लड़ते ये अलगाववाद से जुड़ जाते है। ये लोग अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर देशविरोधी नारे लगाते है। इस प्रकार की युवाशक्ति हमारे देश में सदियों से रही है किन्तु उन्होंने कभी देश के अपमान में एक शब्द भी नहीं कहा। किन्तु आज कुछ लोगो के बहकावे में आकर यही युवाशक्ति अपने पथ से भटक रही है।





२.सायबर युवाशक्ति:
दूसरी प्रकार का युवा वो है जिसे जमीनी हकीक़त से कोई सरोकार नहीं है। जिसके लिए मीडिआ (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ज्यादातर सोशल मीडिआ ) ही साक्षात ईश्वर है। यह वो युवा है जो सिर्फ इंटरनेट पर देश के लिए लड़ाई लड़ता है। यह वो युवा है जिसे सरकार को गालियां देना फैशन लगता है। यह वो युवा है जो आये दिन देशद्रोही और देशभक्ति का प्रमाणपत्र  बांटता फिर रहा है। सबसे खतरनाक तो इनमे से वो है जिन्हे "लॉजिक" और "तथ्यों" से कोई मतलब नहीं होता। ये वो युवा है जो "टार्ड " और "भक्त" नाम के दो समुदायों में बंट के रह गया है। वैसे इनमे एक तीसरा समुदाय भी है जिसे किसी पार्टी, देश या धरम से कुछ लेना देना नहीं होता। इस समुदाय के लोग सबसे काम हानिकारक भी होते है। ये समुदाय है "एन्जेल-प्रिया" या "मीणा-बॉयज" टाइप फेसबुक अकाउंट धारियों का।


३.आक्रोशी युवाशक्ति:
तीसरी प्रकार की युवाशक्ति वो है जिन्हे बस "आदेश" मिलना चाहिए और वो निकल पड़ते है सडको पर। इस प्रकार के युवा इंटरनेट पर ही लड़ाई नहीं लड़ते अपितु सडको पर खुले-आम बसो को, गाड़ियों को, ट्रको को फूंक डालते है। ट्रेनों को जला कर पटरियां उखाड़ फेंकते है। जब जहाँ जैसा मौका मिले वैसा कुकृत्य करते है और ग्लानि तो दूर इनके माथे पर शिकन तक नहीं आती है। ये वो युवा है जिसे पढ़ना लिखना नहीं है, बाौद्धिक मेहनत इनसे नहीं होती है। इन्हे हर प्रकार की शासकीय सुविधा पर एक ख़ास आरक्षित तथा अप्रतिबंधित अधिकार चाहिए। इन्हे आरक्षण चाहिए। इन्हे उसी "इंफ्रास्ट्रक्चर" के लिए आरक्षण चाहिए जिसे यह आये दिन नुकसान पँहुचाते रहते है।


४.बेचारी युवाशक्ति:
ये वो युवाशक्ति है जो देश को ज्यादा फायदा नहीं तो कोई नुकसान भी नहीं पँहुचाते है । ये मेहनत करते है, पढ़ते है लिखते है। रोजी-रोटी कमाने के लिए दिन रात एक कर देते है। ये वो युवा शक्ति है जो रात-रात भर अपनी "तशरीफ़" रगड़ कर काम करते है और ईमानदारी से पूरा का पूरा इनकम टैक्स भी भरते है। ये वो युवाशक्ति है जो अगर नौकरी न भी मिले तो मायूस होकर आरक्षण के लिए पटरियां नहीं उखाड़ते अपितु उसी स्टेशन पर चाय की टपरी खोल कर अपनी आजीविका चलाते है। इनको कोई मतलब नहीं है आप किस पार्टी को अच्छा मानते है किसे बुरा। इनको कोई मतलब नहीं है अगर किसी ने पैगम्बर को बुरा कहा या दुर्गा माँ को अपशब्द कहे। इन्हे मतलब होता है तो इस बात से की आज इनके यहाँ सब्जी क्या बनेगी, आज बेटे को दूध मिलेगा या नहीं, इस महीने की EMI का बंदोबस्त होगा या नहीं, इस बार अपनी बेटी को एडमिशन दिलवा पाउँगा या नहीं और ऐसी ही तमाम जद्दोजहद में जीवन बीत जाता है इनका।


५ . असल देशभक्त युवा:
यहाँ हम उस युवा शक्ति की बात कर रहे है जो बहुतायत में बिलकुल नहीं पायी जाती है। दुर्लभ किसम की युवा शक्ति है यह। इनके मन में असल देशप्रेम होता है जिसे इन्हे "फेसबुक" या "ट्विट्टर" पर साबित नहीं करना पड़ता। इनका देशप्रेम सर्वविदित होता है, जगज़ाहिर होता है। इनके देशप्रेम से किसी भारतवासी को कोई डर नहीं लगता अपितु दुश्मन देशो के हौसले पस्त हो जाते है इनकी देशप्रेमी के आगे। ये वो युवा शक्ति है जो चोटिल होने के बावजूद मोर्चा नहीं छोड़ते।इन्हे अपनी माँ से ज्यादा फ़िक्र भारत माँ की होती है। ये सामने से आतंकवादियों का सामना कर रहे होते है तो पीछे से अपने ही देश के "पथभ्रष्ट" युवाओ के पत्थरो का शिकार भी हो रहे होते है। ये वो युवाशक्ति है जिसे वन्दे-मातरम कहने या तिरंगे के आगे सर झुकाने में किसी धरम की परिभाषा रोकती नहीं है । ये वो युवाशक्ति है जिसके होने से ही हम है और बाकी के युवा है। उन माताओं को हमारा शत शत नमन है जिन्होंने ऐसे युवाओ को जन्म दिया है।




अब आप ही बताईये हमें किस वर्ग के युवा की सबसे ज्यादा आवश्यकता है और हम कितना और किस श्रेणी में योगदान दे रहे है देश को सुदृढ़ करने में ?

नोट: सभी चित्र इंटरनेट इमेज सर्च के माध्यम से विभिन्न सूत्रों द्वारा साभार संकलित

Monday, 20 April 2015

बिरियानी

मुझे पता है की कईयों की तो लार टपक पड़ी होगी इस लेख का शीर्षक पढ़ के। हिंदुस्तान में रहो और बिरियानी से प्यार न करो ऐसा कैसे हो सकता है। लखनऊ से लेकर हैदराबाद तक, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक बिरियानी की महक आपको अपनी और खींच लाएगी।

बिरियानी के चर्चे गली मोहल्ले तो छोड़िये आजकल फिल्मो में भी बहुत होने लगे है। वैसे तो बिरियानी मूल रूप से कभी शाकाहारी व्यंजन रहा ही नहीं किन्तु आजकल वेज-बिरियानी भी उतनी ही शिद्दत से बनायी और खायी जाती है जितना की कभी राजा महाराजा मटन बिरियानी खाया करते थे।
दूसरे व्यंजन तो आपको देखने पर ललचायेंगे किन्तु बिरियानी के प्रति आपका प्यार ऐसा है की बिना देखे दूर से ही अगर कही से महक आ जाये तो आपके पेट में हँसी और मुँह में पानी आ जायेगा। वैसे दम बिरियानी का दम निकाल दो तो वो बन जाता है पुलाओ, बिरियानी का ही भाई है। यह भी कहीं कम नहीं पड़ता सैकड़ो प्रकार से बनाया जाता है। पीस पुलाओ, कश्मीरी पुलाओ, बंगाली पुलाओ तो कहीं शाही पुलाओ के नाम से यह भी अपना रंग जमा ही लेता है।

अपने देश का कोई भी प्रदेश हो और किसी भी धर्म, जाती का समारोह हो बिरियानी और पुलाओ हमारी दावतों का अभिन्न अंग है। में खुद ४ साल हैदराबाद में रहा हूँ तो बिरियानी से तो अपना घर जैसा सम्बन्ध हो गया है। यह बात और है की शुद्ध शाकाहारी होने के नाते मेरी प्लेट में आने का सौभाग्य अब तक सिर्फ वेज बिरियानी को ही मिला है। किन्तु कसम संजीव कपूर और मास्टर शेफ की, शाकाहारी बिरियानी में भी जो मजा है न वो शायद हड्डियों वाली में न हो। खैर छोड़िये, बात बिरियानी की हो रही थी, तो उसी पर रहते है , इंसानो की तरह उसका क्लासिफिकेशन नहीं करना चाहिए।

बिरयानी एक ऐसी चीज है जो खुद अपने दम पर जितनी प्रसिद्द हुयी है उससे ज्यादा तो अजमल कसाब ने उसको नाम दिलाया है। दुनियाभर में कसाब की बिरियानी के चर्चे हुए और अगर यह सच है उसे जेल में बिरियानी मिलती थी तो सोचिये की कितनी ताकत है इस बिरियानी में।  एक आतंकवादी के सारे जुर्म कबूल करवा लाई।

आप ऐसा मत सोचियेगा की मैं भूखा नंगा बैठा हूँ और सुबह से खाने को कुछ मिला नहीं इसीलिए फालतू की चीजे लिखे जा रहा हूँ।  दर-असल आज बीवी ने वेजिटेबल दम बिरियानी बनाई थी और जब मैं खाने बैठा तो मसालों की महक से ही आह हा हा , लार टपक सी गयी। फिर जैसे ही पहला निवाला खाया तो पेट को उस अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुयी जिसके लिए साधु संत तपस्या करते फिरते है।
किन्तु फिर मेरे दिमाग में आया की बेचारे चावल, सब्जियां और मसाले कितने कष्ट सहते है हमारी तृष्णा शांत करने के लिए। खौलते पानी में इन्हे उबाला जाता है और गरम तेल में तड़का लगाया जाता है उसके बाद परत दर परत एक के ऊपर एक इन्हे बिछा के दम घुटने तक पकाया जाता है। तब जाके तैयार होती है लजीज बिरियानी।

कितनी तपस्या, त्याग और कष्ट झेलती है यह बिरियानी, ऐसा सोचते सोचते मैं जैसे ही दूसरा निवाला उठाने लगा तो एक चावल छिटक के बोला।

"खाले हपशी खाले इतना मत सोच, हम तो बने ही इस लिए है, की हमें पका के तुम खाओ। "

 तभी गोभी का टुकड़ा भी मचल के बोला,

"हाँ हाँ हम इतना सब कुछ तुम्हारे लिए ही तो सहते है। कहाँ कहाँ से हमें लाया जाता है , काटा जाता है पकाया जाता है सिर्फ इसलिए की तुम्हारा पेट भर सके और तुम खुश रहो।"

 फिर दूसरा चावल बोला ,

"तुम इंसान तो एक साथ  एक देश, एक शहर और एक मोहल्ले तो क्या एक घर में शांति से नहीं रह सकते। हमेशा लड़ते झगड़ते हो, कभी जाती के नाम पर तो कभी धरम के नाम पर। कभी अमीरी के नाम पर तो कभी गरीबी के नाम पर। तुम लोग खुद के सिवा दुसरो का भला क्या ही सोचोगे। हमें देखो देश के अलग अलग कोने  से आये और अलग अलग जाती धरम के लोगो द्वारा हमें लाया गया है।हम चावल एक गरीब हिन्दू किसान के खेत से आये है, यह आलू एक दलित के हाथो उखाड़े गए थे और यह जो केसर डाला है न बिरियानी में वो एक मुस्लिम ने उगाया था फिर भी हम एक साथ मिलकर इतनी लजीज बिरियानी बन गए।  हम सब मिलकर, एक साथ एक बर्तन में एक ही आंच पर पक कर तुम जैसे कितने ही इंसानो का पेट और मन भरते है । हमें हर मजहब, जाती और वर्ग का इंसान उतने ही प्यार से खाता है जितने प्यार से हमे उगाया और पकाया गया। "

फिर पूरी की पूरी बिरियानी एक सूर में बोल पड़ी

"तुम इंसानो को भी ईश्वर ने बड़े प्यार से बना के भेजा है एक दूसरे का प्यार पाने के लिए, एक दूसरे की हिम्मत और सहारा बनने के लिए। किन्तु तुम लोग............. छोड़ भाई तू रहने दे यह सब, मत सोच इतना, खाले तू आराम से।"







Friday, 20 February 2015

विरोध करो

हमारे देश में ३ विशेष प्रकार के लोग आपको ज़रूर मिलेंगे, एक जो आपकी किसी भी बात पर "हाँजी" की मुंडी हिलाएंगे, दूसरे वो जो आपको हर मोड़ पर, हर कदम पर "राय" देते मिलेंगे और तीसरे वो जो आपकी हर बात का "विरोध" करेंगे। ताज़ा सर्वे के आंकड़े बताते है की तीसरे टाइप के याने की विरोधी स्वाभाव के लोग दिन ब दिन बढ़ते ही जा रहे है।

हर जगह हर कोई किसी न किसी बात का विरोध कर रहा है, विधानसभाओ में विपक्षी दल सत्तारूढ़ दल का विरोध कर रहे है, पत्नियां पतियों का विरोध कर रही है, पप्पू अपनी मम्मी का विरोध कर रहा है , मम्मी मोदी का विरोध कर रही है , सेंसर बोर्ड गालियों का विरोध कर रहा है  और हम अपने सारे विरोध गालियां निकाल के कर रहे है।

अभी अभी वेलेंटाईन डे बीता, हर साल की तरह इस साल भी बहुत दिलजलों ने इसका विरोध किया। शादी से पहले हमने भी गर्लफ्रेंड बनाने की कोशिश की तो हमारे घरवालो ने विरोध किया और शादी के बाद कोशिश की तो घरवाली ने विरोध किया तो तैश में आकर हमने भी इस वेलेंटाईन डे का विरोध कर डाला।

खैर अगर इतिहास खंगाले तो विरोध करना भारतियों के स्वाभाव में था ही नहीं, किन्तु जब से गांधी जी ने अवज्ञा आंदोलन का पाठ पढ़ाया और उस पाठ को हमने इतिहास की किताबो में रटा तब से हमे विरोध करने की आदत सी हो गयी है। यह बात और है की हमारा विरोध कहीं नोटिस नहीं होता न ही उस चीज से बच पाते है जिसका विरोध हम करते है।

मसलन स्कूल न जाने का , सुबह जल्दी न उठने का , होमवर्क न करने का , खेलने न जाने देने का , बर्फ का गोला न खाने देने का और कद्दू, करेले, बैगन, मेथी, पालक, मूंग दाल का विरोध तो आपको याद ही होगा जो बचपन में बहुत किया। टाँगे पटक पटक के किया, मूह फाड़ के, दहाड़े मार के और जमीन पर लेट के किया, किन्तु इतना विरोध करने से आखिर मिला क्या ? कुछ नहीं।

इससे तो अच्छा होता की हमारी माँ ने ही बाबूजी का कुछ विरोध किया होता, तो कम से कम हम इस निर्दयी दुनिया में आने से तो बच जाते।  बचपन में कुचले गए हमारे विरोध की खुन्नस हम उम्रभर किसी न किसी तरह का विरोध करके निकालते रहते है।

आज की दुनिया में तो आलम यह है की अगर सारी दुनिया किसी चीज का विरोध कर रही है और आप कुछ नहीं कर या कह रहे तो आप एक नंबर के चु**ये करार दिए जायेंगे। आजकल अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए आपको किसी अनशन पर थोड़े ही बैठना है न ही पुलिस के डंडे खाने है। सोशल मिडिया का ज़माना है भई और इस ज़माने में विरोध करना कितना आसान है, जिस किसी ने भी विरोधी स्वाभाव की पोस्ट डाली हो  उसपे जाके बस एक "Like" बटन ही तो दबाना है, या किसी की पोस्ट अच्छी न लगे तो उसको थोड़ा गरिया दो याने गालियां पटक दो बस हो गया विरोध और आप बन गए इंटरनेट के "Intellectual" प्राणी। कुछ ज्यादा तूफ़ानी करना हो तो उस पोस्ट की अपने निहायती घने नेटवर्क(फेसबुक, व्हाट्सप्प, ट्विटर) में आग की तरह फैला दीजिये। और ऐसा करके आपने अपने हिस्से की समाज सेवा कर ली मानो।

अब अगर राजनीती की बात करे तो विपक्ष में बैठी पार्टियों का भी तो एक ही काम है , विरोध करो। कुछ भी हो जाये बस सरकार के कामो का विरोध करो। सरकार ने गरीबो के लिए बैंक खाते खुलवाये, विरोध करो, सरकार ने उद्यमियों की सुविधा के लिए कदम उठाये, विरोध करो, बस किसी न किसी तरह विरोध करो। जब कांग्रेस की सरकार ने परिवार नियोजन लागू किया तब लालू विपक्ष में थे उन्होंने इस योजना का विरोध किया, परिणामस्वरूप दर्जन भर बच्चे पैदा कर डाले।  अभी हमारी कांग्रेस पार्टी ने तो आतंकवादियों के इरादो पर पानी फेरने वाले सुरक्षाकर्मियों का ही विरोध कर दिया। अब तो हालत यह है की विपक्षी पार्टियों के अंदर ही एक दूसरे का विरोध शुरू हो गया है।ताजा हाल यह है की बिहार में एक ही दल के २ मुख्यमंत्री एक दूसरे के विरोध में खड़े है।

परन्तु असल बात तो यही है की जिसका जितना ज्यादा विरोध वो चीज उतनी तेज़ी से फैलती है , उदाहरण देखिये। बचपन में होमवर्क का विरोध किया तो वो बढ़ गया, खेल और टीवी पर पाबन्दी का विरोध किया तो १० और चीजो पर पाबन्दी लग गयी। आज की बात करे तो मोदी जी का १० सालो तक भयानक विरोध किया गया, किन्तु फल क्या निकला ?वो उतनी ही प्रचंडता से सरकार में आये। इधर दिल्ली में मोदी ने केजरीवाल का विरोध करने में पूरी ताकत झोंक डाली, और इस विरोध का परिणाम क्या निकला वो तो आप जानते है। आतंकवाद का विरोध पूरी दुनिया सालो से करती आ रही है, किन्तु क्या हुआ? रुकने की बजाये यह तेज़ी से विश्व के हर देश में फैलता जा रहा है। स्वास्थ्य की बात करे तो हम लोग एबोला और स्वाईन फ्लू का कितना विरोध कर रहे है फिर भी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। और सबसे बड़ा उदहारण फिल्म PK, कितना विरोध हुआ इस फिल्म का, किन्तु सबसे ज्यादा कमाई भी इसी फिल्म ने की।

इतने सरे उदाहरणों से कुछ समझे आप ? मतलब ये है की जिस चीज का जितना तगड़ा विरोध करो वो उतनी ही तेज़ी से फैलती है, सीधे सीधे न्यूटन महाराज का तीसरा नियम लागू हो रहा है।

तो अब ध्यान रखे, जब भी पेट्रोल के दाम घटे तब आप विरोध करे, जब भी अर्थव्यवस्था सुधार की बात हो आप विरोध करे, जब भी सेंसेक्स ऊपर चढ़ता दिखे तुरंत उसका विरोध शुरू करे, सफाई अभियान का विरोध करे, स्वाईन फ्लू और अन्य बीमारी से बचने के लिए जो निर्देश दिए है उनका विरोध करे, यहाँ तक की अगर कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत न ले तो उसका भी विरोध करे, फिर देखिये कैसे हमारा देश तरक्की करता है।

मैंने तो सरकार को चिट्ठी लिख के अपना यह प्रस्ताव भी भेजा है की सरकार अपने ख़ुफ़िया सोशल नेटवर्किंग डिपार्टमेंट को ही यह काम सौंप दे, विरोध करने का, बाकी हम "लाइक और शेयर" के बटन तो दबा ही देंगे।

तो कुल मिलाकर मन की शांति और देश की तरक्की के लिए विरोध करते रहिये। हम पैदा ही विरोध करने और सहने के लिए हुए है।




Monday, 12 January 2015

नाम में क्या रखा है

"नाम में क्या रखा है ?" शेक्सपियर तो इतना कहके निकल लिए, उनको क्या मालूम था की यहाँ भारत में नाम के पीछे कितना कोहराम है।
स्रोत: गूगल इमेज सर्च 


आजकल के लेखक, पत्रकार, दार्शनिक भी जब कुछ लिखते है तो नायक नायिका के नाम लेने से परहेज करते है। बेवजह का "साम्प्रदयिक" तनाव पैदा हो सकता है इसीलिए कोई नाम नहीं लेता। यहाँ तक की पुलिस थाने में भी रिपोर्ट "अज्ञात" लोगो के नाम की लिखी जाती है, फिर भले ही सबूत के तौर पर पेश किया गया वीडियो चिल्ला चिल्ला के अपराधी का नाम ज़ाहिर कर रहा हो।

खैर इन सब के बारे में आप सब जानते हो, मैं आपको नामो की वजह से होने वाली एक अलग ही वैश्विक समस्या से आपको अवगत कराने की मंशा रखता हूँ। हालाँकि आप में से अधिकांश लोगो को यह समस्या झेलनी पड़ी होगी।

जवान हो, अपने पैरो पर खड़े हो तो घरवाले आप पर सबसे बड़ा दबाव डालेंगे की शादी कर लो, वो भी हो गया तो सालभर के भीतर आप पर एक नया दबाव आ जायेगा, २ से ३ होने का। कहीं कहीं तो मैंने यह भी सुना है की एम्प्लोयी ने इन्ही सब बातों का रोना रोकर अपने मैनेजर को इतना इमोशनल ब्लैकमेल किया की उसको सैलरी हाईक मिल गयी। खैर आप २ से ३ भी हो गए, अब आपके सामने सबसे बड़ी समस्या यह नहीं है की डाइपर कौन बदलेगा, न ही इस बात की चिंता है की रात रात भर जाग के दूध की बोतल कौन भरेगा बल्कि सबसे बड़ी चिंता का विषय है की इस नए मेहमान का नाम क्या रखे ?

स्रोत: गूगल इमेज सर्च 

आज के जमाने में "यूनिक" नाम रखने का चलन है। लोग अपने पालतू पशुओ का नाम भी मोती, ब्रूनो, टाइगर या शेरू नहीं रखते बल्कि यूनिक सा अंग्रेजी सा कोई नाम ढूंढ़ते है। बात खुद के बच्चे की हो तो नाम थोड़ा ख़ास ही ढूंढ़ना पड़ता है और ये यूनिक नाम ढूढ़ने पर भी नहीं मिलते। हालांकि कई माँ-बाप तो अपने खुद के नामो के प्रथम २ अक्षरो की संधि करके ही यूनिक नाम बना लेते है।  परन्तु हर पति पत्नी ऐसा नहीं कर सकते तो ऐसे में बेचारा पति सारी  रात इंटरनेट पर सर्च करके कोई "भल्ता सा" ही सही पर यूनिक नाम ढूंढ़ता है तो पत्नी कहती है, नहीं यह नाम तो मेरी मौसी की बेटी के देवर के बच्चे का भी है, कोई "यूनिक" नाम ढूंढो। फिर जाके २-४ "बेबी नेम्स" वाली किताब खरीद के लाते हो, फिर भी मनपसंद नाम तो किसी के भाई के साले के बच्चे का निकलता है तो कोई नाम दोनों पति पत्नियों में से किसी के दोस्त अपने बच्चो को दे चुके होते है । हजारो नाम खारीज़ करने के बाद बड़ी मशक्कत से एक यूनिक नाम आप ढूंढते हो। अब आप सेलिब्रेशन की तैयारी कर ही रहे होते हो की आपके घरवाले जाके किसी पण्डित से बच्चे की कुंडली बनवा आते है और नाम का अक्षर तय हो जाता है की अब नाम तो इसी अक्षर से शुरू होगा। फिर शुरू होती है वही कहानी, गोल गोल धानी और इत्ता इत्ता पानी।



मेरे एक परिचित ने तो यूनिकनेस के चक्कर में कंफ्यूज होके अपने बच्चे का नाम "चमन" रख दिया तो उसके पहले जन्मदिन पर आये मेहमानो ने जैसे तैसे समझाया की कैसे तुम अपने ही बच्चे को उसके बाप का कतल करने के लिए उकसा रहे हो।  अभी अभी मेरे एक बहुत खास और बहुत ही कांग्रेस विरोधी दोस्त ने अपना खुद का ही नाम राहुल से बदल के वरुण रख लिया है।

क्या आप अब भी कहेंगे की नाम में क्या रखा है ? अब तो शेक्सपियर भी अपने शब्द वापस लेने को तैयार होंगे।

Friday, 12 December 2014

कांग्रेस मुक्त भारत




अभी अभी कुछ दिनों पहले सुनने में आया था की हैदराबाद के हवाई अड्डे  का नाम "राजीव गांधी हवाई अड्डे "  से बदल कर N.T.रामाराव  हवाई अड्डा रख दिया गया है। खबर सुनकर राजनितिक गलियारों में हड़कम्प मच गया था , खासकर कोंग्रेसियों के तो पेट ज्यादा खराब हो गए। वैसे भी कोंग्रेसियों के पास है ही क्या "इन ३ नाम" के अलावा ?

खैर जब इस खबर को खंगाला गया तो मेरे ख़ुफ़िया सूत्रों ने जो बात बताई वो बड़ी ही चौंकाने वाली है, हाँ आप भी चौंक जाओगे , दर-असल हवाई अड्डे का नाम बदलने के पीछे मोदी जी का हाथ है , जी हाँ भाई साब पुख्ता खबर है।  कुछ महीनो पहले के उनके भाषणो को याद करो तो आपको याद आएगा की मोदी जी ने हर जगह लगभग हर दिन एक नारा जोर जोर से लगाया था और वो था "कांग्रेस मुक्त भारत" का नारा।

आदरणीय केजरीवाल जी ने भी अपनी मुहर लगा दी है  इन सब के पीछे मोदी जी और अडानी /अम्बानी का हाथ है , एक गजेटेड ऑफिसर के द्वारा अटेस्टेड होने पर यह खबर और भी पुख्ता बन गयी है।

अब देश में कांग्रेस के पास ले देकर पूर्वजो (जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी) के नाम के अलावा कुछ बचा नहीं , और अगर कांग्रेस को जिन्दा रखना है तो इन नामो को जिन्दा रखना होगा, इसीलिए सोच समझ कर पिछली कांग्रेस सरकारों ने देश में ४५० से ज्यादा सरकारी योजनाओ,  भवनो, सडको , विश्वविद्यालयों इत्यादि के नाम इन तीन लोगो के नाम पर ही रखे है , ताकि इनके नाम पर ही सही लोग कांग्रेस को "कुछ अच्छे" के लिए याद रख सके।

Pic Courtesy  A Suryaprakash


किन्तु मोदी जी ने तो देश को कांग्रेस मुक्त करने की मानो शपथ सी ले रखी है। इसीलिए यह शुरुआत है की सबसे पहले सरकारी योजनाओ को गांधी-नेहरू परिवार के नाम से मुक्त किया जाये, फिर धीरे धीरे एयरपोर्ट, पोर्ट , स्टेडियम, सड़क, चौराहो और विश्विद्यालयों के नाम से नेहरू-गांधी हटाया जायेगा।

हैदराबाद में एयरपोर्ट का नाम बदल के कुछ हद तक कांग्रेस मुक्त भारत की और एक कदम उठा लिया है मोदी सरकार ने।  हमारे ख़ुफ़िया सूत्रों ने तो यहाँ तक खबर दी है की जल्द ही सरकार एक विधेयक लाने  वाली है जिसके तहत देश में जिसका भी नाम राजीव, राहुल, सोनिया, प्रियंका या रॉबर्ट (वैसे भी आजकल जवाहर, और इंदिरा नाम कोई नहीं रखता) होगा उसको सरकारी सुविधाओं से वंचित रखा जायेगा, उन्हें अपना नाम बदलना होगा। यही नहीं किसी ने अपने बच्चे का नाम इनमे से कुछ रखा तो उसे जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, या पासपोर्ट जारी नहीं किया जायेगा।  यह सब महत्त्वाकांक्षी योजनाएं अभी मोदी सरकार के मंत्रीगण  बना रहे है और जल्द ही इन्हे मोदी जी के समक्ष प्रस्तुत करके वाह वाही लूटने की तैयारी में है।

तो दोस्तों तैयार हो जाओ कांग्रेस मुक्त भारत के लिए।  अरे अरे.…………  अभी अभी एक और ख़ुफ़िया खबर आयी है की दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी को सुझाओ दिया है की वो "गांधी" सरनेम का पेटेंट कांग्रेस के नाम पे रजिस्टर करवा के कॉपी राइट लेले ताकि कोई और इसका फायदा न उठा सके।  सुना है की राहुल बाबा ने बात को मानते हुए अर्ज़ी दे दी है।  अगर ऐसा हो जाता है तो गांधी सरनेम वाले सभी लोग कांग्रेस की अधिसंपत्ति माने जायेंगे, .......ओह्ह्ह ...... फिर मेनका और वरुण का क्या होगा ?

खैर जो भी हो आप हमारे साथ लगातार लगातार बने रहिये, आपको लेटेस्ट अपडेट के साथ सरकार के अंदर की खबर देने फिर आएंगे, तब तक के लिए गुड नाईट।

डिस्क्लेमर: उपरोक्त लेख लिखते समय लेखक ने ४ बोतल वोडका अपने गले में उँडेली हुयी थी और उसकी टेबल पर ४ रैपर भांग की गोली के भी पाये गए थे। और जब तक मैंने यह लेख ब्लॉग पर डाला तब तक भी लेखक को होश नहीं आया था।




Monday, 2 June 2014

एक रेल यात्रा और २ स्मरणीय नाम

एक रेल यात्रा और २ स्मरणीय नाम

बात १९९० की गर्मियों की है, में और मेरी मित्र भारतीय रेलवे सेवा के प्रशिक्षु के तौर पर लखनऊ से देल्ही तक का सफर कर रहे थे।  हमारी ही बोगी में २ सांसद भी सवार थे जिनसे हमे कोई परेशानी नहीं थी, परन्तु उनके साथ यात्रा कर रहे उनके १०-१२ साथियो ने बड़ी ही बदतमीज़ी से हमसे बात की। उन लोगो ने हमारी आरक्षित सीट से ही हमें उठा कर खुद सवार हो गए ,  और तो और भद्दी भद्दी टिप्पणियाँ भी करते रहे। उस बोगी में कोई भी यात्री या टिकट चेकर हमारी सहायता करने आगे नहीं आया। हम लोगो ने भय युक्त वातावरण में जैसे तैसे रात गुजारी। 

अगले दिन सुबह हम डेल्ही पहुंचे, तथापि उन गुंडों ने हमें कोई शारीरिक क्षति तो नहीं पहुचाई परन्तु मानसिक रूप से हमें बहुत आघात पंहुचा था।  मेरी मित्र को तो इतना गहरा सदमा पंहुचा था की उन्होंने प्रशिक्षण का अगला चरण टालना ही उचित समझा जो की अहमदाबाद में होना था।

मेने अहमदाबाद जाने का निर्णय किया क्योंकि एक और प्रशिक्षु मेरे साथ यात्रा करने वाली थी। इस बार हम आरक्षण नहीं करवा पाये और वेटिंग का टिकट लेकर ट्रैन में चढ़ गए।  प्रथम श्रेणी के कोच में TTE  से हमने बात की और समझाया की हमारा अहमदाबाद पहुचना कितना जरूरी है, वो हमें एक द्विशायीका (कंपार्टमेंट ) में लेके गया और बैठ कर कुछ देर इन्तेजार करने को कहा। मेने अपने संभावित सह-यात्रियों की और देखा जो की अपने परिधानों से किसी राजनैतिक पार्टी के नेता ही लग रहे थे। मुझे अपनी पिछली यात्रा का संस्मरण हो आया और मेरी भाव-भंगिमा से मेरे भीतर की घबराहट मेरे मुख पर स्पष्ट दिखाई पड़ रही थी। TTE ने मेरे चहरे के भाव पढ़कर मुझे आश्वस्त किया की ये लोग सभ्य और  नियमित यात्री है। 

उनमे से एक कुछ ४० पार रहा होगा और दूसरे की उम्र कुछ ३५-४० रही होगी। उन लोगो ने ख़ुशी ख़ुशी हमारे लिए बैठने की जगह बनाते हुए खुद को एक कोने में समेट लिया। उन दोनों ने अपना परिचय गुजरात के भाजपा नेताओ के रूप में दिया, उन्होंने अपने नाम भी बताये मगर नाम हम याद नहीं रख पाये, हमने भी उन्हें बताया की हम आसाम से रेलवे सेवा के प्रशिक्षु है। हम लोगो ने कई विषयों पर बातचीत की, विशेषकर इतिहास पर। मेरी मित्र ने इतिहास में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर रखी  थी सो उसने बढ़चढ़ कर चर्चा में हिस्सा लिया, मेने भी बीच बीच में भाग लिया। नेताओ में से जो वरिष्ठ थे उन्होंने ने उत्साह के साथ चर्चा में अपनी हिस्सेदारी दिखाई जबकि दूसरे नेता ने सुनने में अधिक रूचि दिखाई। 

बातो के बीच में मेने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु का जिक्र किया की कैसे उनकी मौत आज तक एक रहस्य बनी  हुयी है।  कनिष्ठ नेता जो की अब तक बगैर ज्यादा कुछ कहे सिर्फ सुन रहे थे, अचानक बोले : "आप श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में कैसे जानती है ?", तब मेने उन्हें बताया की किस प्रकार से उन्होंने मेरे पिताजी की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति का इन्तेजाम किया था। 

अचानक से वरिष्ठ नेता ने हमसे कहा , "आप लोग गुजरात में हमारी पार्टी क्यों नहीं ज्वाइन कर लेते ?" हमने जोर का ठहाका लगा के कहा की हमारे बस का ना है और वैसे भी हम गुजरात के नहीं है , तभी छोटे नेता ने कहा : " तो क्या फरक पड़ता है अगर आप आसाम से हो, हमारे यहाँ प्रतिभावान लोगो का स्वागत है ", यह  कहते वक़्त उनके शांत गंभीर चेहरे पर एक चमक सी साफ़ नज़र आ रही थी। हमे प्रतीत हुआ की ये सिर्फ कहने की बात नहीं थी , बल्कि वो लोग गंभीर थे। 

खाना आ चूका था, ४ शाकाहारी थालियां।  हम चारो ने शांतिपूर्वक भोजन किया और जब पेन्ट्री वाला पैसे लेने आया तो छोटे वाले नेताजी ने पूरा भुगतान स्वयं किया।  मेने धीरे से धन्यवाद दिया, उन्होंने सीधे तौर पर दरकिनार करते हुए कहा की इतनी छोटी बात के लिए कैसा धन्यवाद।  उस समय उनके आभामंडल पर जो चमक थी वो देखने लायक थी।

 इतने में TTE  ने आकर हमें सीट की अनुपलब्धता के बारे में जानकारी देकर अपनी असमर्थता ज़ाहिर की और कहा की कुछ और इन्तेजाम नहीं हो सका।  इतना सुनते ही वो दोनों नेतागण तपाक से बोल पड़े की चिंता करने की कोई बात नहीं है हम व्यवस्था कर देंगे। उन्होंने बड़े आराम से निचे फ्लोर पर चादर बिछाई और सो गए और हमने उन लोगो की सीट पर कब्ज़ा जमा लिया। 

पिछली ट्रैन यात्रा और इस यात्रा में कितना बड़ा अंतर था, एक तरफ उन राजनेताओ का झुण्ड जो सभी सह-यात्रियों से बदतमीज़ी कर रहे थे और एक तरफ यह २ नेता जिनके साथ हमे पूर्ण सुरक्षा का अनुभव हो रहा था। अगली सुबह जब ट्रैन अहमदाबाद के करीब पहुंची तो वरिष्ठ नेता ने हमसे हमारे रहने के प्रबंध के बारे में पूछा और अपना पता बताते हुए कहा की कुछ भी समस्या हो तो हम बेझिझक उनके घर जा सकते है, छोटे वाले नेता ने कहा की मेरा तो अहमदाबाद में कोई ठौर ठिकाना नहीं है , परन्तु आप लोग इनका निमंत्रण स्वीकार कर सकते हो और कोई भी परेशानी हो तो बता सकते हो, हम हर संभव सहायता की कोशिश करेंगे। 

 यह सब बातें करते वक़्त उन दोनों के मुख पर एक गंभीरता और आशावान चमक थी। हमने अपने रहने के प्रबंध के बारे में उन्हें आश्वस्त किया और निमंत्रण के लिए उन्हें सहृदय धन्यवाद दिया।  

इससे पहले की ट्रैन  स्टेशन पर रूकती और हम लोग उतर कर अपने अपने गंतव्य की और प्रस्थान करते मेने अपने बैग से अपनी डायरी और पेन निकलते हुए उन दोनों से अपने अपने नाम लिखने का आग्रह किया। क्योंकि में उन दो विशाल ह्रदय वाले नेताओ का नाम नहीं भूलना चाहती थी जिन्होंने नेताओ के प्रति मेरे पूर्वाग्रह को एक अलग ही दिशा प्रदान की थी। 

उन्होंने डायरी लेकर एक -एक करके अपना नाम लिखा , उम्र में बड़े दिखने वाले नेता ने लिखा शंकर सिंह वाघेला और छोटे नेता ने लिखा नरेंद्र मोदी। 

यह पूरा घटनाक्रम मेने १९९५ में एक असमीज़ समाचार पत्र में लिखा था, यह उन दो गुजरती नेताओ के प्रति मेरी आदरांजलि थी जिन्होंने निस्वार्थ भाव से हम दो असमिया बेन  के लिए इतना कुछ किया था।  By Leena Sarma
(The author is General Manager of the Centre for Railway Information System, Indian Railways, New Delhi. leenasarma@rediffmail.com)

नोट: प्रस्तुत लेख अंग्रेजी समाचार पात्र "द  हिन्दू " में १ जून २०१४ को प्रकाशित हुआ था , उसी का हिंदी अनुवाद मेने यहाँ प्रस्तुत किया 

 अंग्रेजी में पढ़ने के लिए निचे दिए लिंक पर जाये :



Thursday, 15 May 2014

Dream Bollywood Government


Government is being formed in India, we have voted for our favorite party/candidate. Now Political parties are keen on forming government, everywhere in India politics is flowing, how boring na ??

So leave that work on political parties, lets discuss Bollywood. Considering the second most interesting thing in India after Cricket Bollywood has it's own charm. 
Imagine if we have to chose our government from the mass of Superstars of Indian film industry, how would it be ?

So I have prepared my dream Bollywood government as follows:


1. Prime Minister
If I had to chose our PM from film industry, and at the same time we talk about Power, persona and acceptability then the only name emerges which is none other that our Rajini Sir




2.Finance minister
The way he is managing his finances in his 70s, the way he stood again once failed, and the way he is still earning crores every year when his son is failed, Our finance minster should be Amitabh Bachchan.



3. Defense Minister
Now this I can leave on your imagination, and I know that here I will match with your pick. Considering the number of movies done by him against Pakistan or to save India he is the definite choice for Defense minister of India. 




4.Minister of women and child affairs
In this country if some one has given more jobs to women than anyone else then she is surely Ekta kapoor.
She kept busy most of the women not only in Prime time, but the killing noon time. So for this ministry Ekta Kapoor is the perfect choice.





5. Foreign Minister
If Yash Chopra was alive today, he would have been the first one to given mandate for this ministry. In absence of Yash jee, we can give this job to Karan Johar. He is good at negotiation, good at communication, good at keeping friends with two mutual enemies. Considering all these qualities, he can be the best Foreign minister.  




6. Health Minister
For this post, we have a tough fight between Jitendra and Salman (since Amitabh jee already given Finance ministry, he is out of this race). So based on the current popularity and health conditions, the one who has motivated a lot of youth of India for a better health is none other than Salman Khan.




7. Education Minister
This job is not only tough but very challenging in a country like India. In Bollywood I can find only person who can do justice to this job is one who has educated people that humanity is bigger than anything else, he has demonstrated that how entertainment can be mixed with education. 
Yes I am talking about Rajkumar Hirani.



8. Railway Minister
Considering his obsession with Trains (DDLJ, Dil se, Chennai Express etc), who else you can think for this job. So obviously Shahrukh khan will be handling out railway ministry.



9. Home minister
Home affairs to be dealt with emotions, love and caring. Home affairs should be considered as family affairs and handled in that way. So give me a name who is good at family bonding, good at family affairs ? 
yes, the one and only Suraj Barjatya.



and the last but not the least





10. Textiles Minister
If I give my money bag to a person who doesn't need money then my money will be safe, right. So giving that logic my best preference for textile minister is another Sunny.



Waiting for your dream cabinet from Bollywood .......


Thursday, 30 January 2014

Piclog-3


After piclog-1, piclog-2 here I am with third version of piclog, this time the theme is "Jeev-Jantu" :

I hope you would enjoy this piclog....


 An Indian leader, when we select him as MP or MLA, a clean and white image


 Judiciary system , can only watch and tell others to wait for justice

 A proud and caring mother....


 Aam aadmi, bole to sota hua sher ( a sleeping Tiger depicting a common man)






The same leader who we chose as MP or MLA, after some time....

Thursday, 21 November 2013

प्रधानमंत्री का विदाई भाषण (Farewell speech of PM)


प्रस्तुत लेख एक कल्पना  मात्र है, यहाँ उपयोग किये गए नाम वास्तविक लग सकते है परन्तु वह एक संयोग मात्र होगा। इस लेख का प्रयोजन सिर्फ अपने पाठको का मनोरंजन करना है न कि किसी कि भावनाओ को आहात करना, फिर भी अगर किसी विशेष राजनितिक दल कि भावनाओ को ठेस पहुचती है तो इसके लिए वो खुद और इस लेख में आये हुए नाम जिम्मेदार है।

दिन : १ जून २०१४
स्थान: राम लीला मैदान, दिल्ली
घटना: श्रीमान मन्नू भाई जी कि देश के P.M पद से विदाई
कारन: श्रीमान नमो भाई जी कि देश के P.M पद कि शपथ


आज नमो देश के प्रधानमंत्री पद कि शपथ राम-लीला मैदान में लाखो लोगो कि मौजूदगी में लेने जा रहे है, परन्तु उससे पहले एक विशेष घटना घटित होने को है, जिसके लिए देश  १० सालो तक तरसता रहा, वो होने जा रहा है, आज मन्नू जी कुछ "कहने " जा रहे है।

जी हाँ , मन्नू जी ने नमो जी से आग्रह किया कि वो भी सचिन तेंदुलकर कि तरह एक विदाई भाषण देना चाहते है, परन्तु वानखेड़े स्टेडियम कि तरह लाखो लोग जुटा पाना मुश्किल है इस लिए वो नमो जी के शपथ ग्रहण समारोह में अपनी स्पीच देना चाहते है और जैसा नमो जी ने यह आग्रह स्वीकार किया और आज मन्नू जी को "बोलने " का मौका देते हुए "इंक्लूसिव पॉलिटिक्स " का उदहारण प्रस्तुत किया।

जैसे ही मन्नू जी अपने दोनों हाथ अपनी जैकेट कि पॉकेट में डाल के, इठलाती हुयी अपनी "मनमोहक" चाल में चलते हुए  मंच पे आके पोडियम पर खड़े हुए वैसे ही सारी जनता हल्ला मचाने लगी, मन्नू जी ने धीरे से माइक के करीब जाके कहना आरम्भ किया। ....

दोस्तों----- बैठ जाईये _ _ _ _ कृपया करके शांत हो जाईये _ _ _ फिर भी जनता चुप नहीं हुयी,

तभी मन्नू जी ने मीरा कुमारी जी कि तरफ देखा, वो तुरंत दौड़ती हुयी माइक पे आयी और बोली, शांत हो जाईये, बैठ जाईये, शांत हो जाईये, बैठ जाईये, मन्नू जी को सुनिये - _ _ _ और मन्नू जी को माइक देते हुए वो वापस लौट गयी।

मन्नू जी ने फिर कोशिश कि, देखिये आप शांति से नहीं बैठेंगे तो में आज भी कुछ नहीं बोलूंगा _ _ _

"आज भी कुछ नहीं बोलूंगा _ _ " यह सुन के पुरे मैदान में सन्नाटा पसर गया.

मन्नू जी ने शुरू किया_ _ _ _ _ _ _
"मेरी जिंदगी के १० साल,  ७ रेस कोर्स रोड से १० जनपथ  के बिच कि भाग दौड़ में कब बीत गए पता ही नहीं  चला, आज मेरी उसी जिंदगी का आखिरी दिन है, मेरी इस जिंदगी को यादगार बनाने में बहुत लोगो का योगदान रहा है में सभी का शुक्रिया करना चाहता हूँ" फिर मन्नू जी ने अपनी पॉकेट से एक हाथ निकालते हुए रूमाल से अपनी नाक साफ कि और फिर कहना शुरू किया_ _ _ _

"सबसे पहले तो में शुक्रिया करना चाहता हूँ नमो जी का _ _ _तभी अचानक लोगो ने चिल्लाना शुरू किया  मोअअअ दी _ _ _ मोअअअ दी___मोअअअ दी_ _ अबकी बार नमो जी ने जनता को कहा " मित्रो शांत हो जाईये " और जनता चुप हो गयी.

मन्नू जी ने एक बार फिर आरम्भ किया, "नमो जी कि वजह से आज मुझे बोलने का मौका मिला है , आज मुझे अपनी विदाई का भाषण देने का मौका मिला है, नमो जे कि वजह से मुझे अब बुढ़ापे में आराम करने का मौका मिला है।

में मैडम जी का भी शुक्रगुजार हूँ कि आज उनके मार्गदर्शन में काम करने कि वजह से मुझे P.M. पद से विदाई मिल रही है, मैडम जी कि वजह से ही में आज इतना फिट हूँ क्योंकि मुझे रोजाना ७ रेस कोर्स से भाग के १० जनपथ कई बार आना पड़ता था.
यकीन ही नहीं आता कि आज से मेरी जिंदगी में केवल एक मैडमजी रह गयी है_ _  मेरी पत्नी।

में शुक्रगुजार हूँ अपने मंत्रिमंडल का जिनकी करतूतो कि वजह से आज मुझे "चोर" जैसे सम्मानो से नवाज़ा जाता है.
में तहे दिल से धन्यवाद देना चाहता हूँ अपनी भारत माता का जिसने मेरी हर शैतानी को नजरअंदाज किया, मेरे हर घोटालो को सहा, मेरे लिए कई टैक्स पेयर्स ने बड़े बड़े बलिदान दिए उनका भी शुक्रिया।

राउल बाबा_ _ _ अब उनके बारे में क्या कहु ? इस नौजवान लडके ने मेरे लिए अपनी पूरी जवानी दांव पे लगा दी, अपनी पढ़ाई लिखाई छोड़ के हमारी सरकार के चर्चे देश के कोने कोने में करवाये, यहाँ तक कि ४४ साल कि उम्र में भी अपना "भोलापन" खोने नहीं दिया।

में धन्यवाद करना चाहता हूँ मनीष,  कपिल,दिग्गी, शीला, खुर्शीद भाई और कलमाड़ी बाबू का जिनके कारनामो कि वजह से मेरा इतना नाम हुआ पुरे विश्व में कि में अपने दोनों हाथ कभी जेब से नहीं निकल पाया और अपना सर कभी ऊपर नहीं उठा पाया, बहुत बहुत शुक्रिया इनका कि आज मुझे "काम" (जो मेने कभी किया नहीं) से मुक्ति मिल रही है।

सीबीआई , जी हाँ में तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ सीबीआई का जिन्होंने मुझे कठीन से कठीन परिस्थितियों में भी महफूज़ रखा.

मेरा राजनितिक कैरियर १९९१ में शुरू हुआ, परन्तु मेरे नाम और शोहरत के पीछे  टर्निंग पॉइंट था २००४ में  मैडम जी का P.M न बनना और मुझे इस पद के लिए आगे करना। बस तभी से मेरे जीवन के गौरव शाली क्षणों कि शुरुआत हुयी और आज में इस मकाम पर पंहुचा हूँ।
मैडम जी आज भी मुझे रोज फ़ोन करती है और हर घोटाले के बारे में मुझे "मौन" रहने कि सलाह देती है।


मेने पार्टी और मैडमजी के लिए बहुत कुछ किया अब में देश के लिए कुछ करना चाहता हूँ इसीलिए अपना पद त्याग कर विदाई चाहता हूँ।

में आभारी हूँ मिडीया का जिसने मेरे कुछ कारनामो को दबाया और कुछ कारनामो को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया और मुझे इंटरनेशनल हीरो बनाया।


यह पल मेरे लिए बहुत भाव-विभोर कर देने वाले पल है, में जानता हूँ कि मेरा भाषण थोडा लम्बा हो रहा है परन्तु विश्वास कीजिये _ _ _ मेने कभी इतने सारे लोगो के सामने इतनी देर तक नहीं बोला_ _  आज आप लोगो ने मुझे सुन कर इमोशनल कर दिया है। में आप सब लोगो का भी आभारी रहूँगा जिन्होंने नमो जी को वोट देकर मुझे पदमुक्त करने में अहम् भूमिका निभायी है। आप लोग दूर दूर से यहाँ नमो जी कि शपथ ग्रहण रैली में आये है और मुझे सुन रहे है , धन्यवाद।  आपलोगो कि यादें मेरे ज़ेहन में हमेशा ताज़ी रहेंगी खास कर के  चोर _ _ चोर _ _ 2G , 3G , कोयला, CWG  यह सारे शब्द मेरे कानो में  मरते दम तक गूंजते रहेंगे।

बस इन्ही शब्दो के साथ में विदाई चाहता हूँ , ठीक है।  गुडबाय। ………






-कार्टून : इंटरनेट पर मौजूद आर्टिस्ट्स के सौजन्य से


Friday, 4 October 2013

रॉयल्टी और राष्ट्रपिता


मित्रो अभी कुछ दीनो पहले खबरें आई थी की जानेमाने लेखक/ गीतकार सलीम साहेब और जावेद अख़्तर ने किसी  फिल्म के निर्माताओ पर मुक़दमा ठोका था की इन्हे कोई लगभग 7 करोड़ रुपये रायल्टी के तौर पर मिलना चाहिए क्योंकि फिल्म तो असलियत मे इन्ही के द्वारा लिखी गयी थी.. ऐसे ही संगीत, साहित्य और कला के क्षेत्र में भी रॉयल्टी का बड़ा महत्व है। 

आखीर यह रायल्टी भी कितने कमाल की चीज़ है, काम आप आज जवानी मे करके जाओ और सठियाने की उमर मे मुनाफ़ा कमाओ और तो और मरने के बाद आपकी पीढ़ियाँ आपके नाम का माल खाएगी| उदाहरण के रूप मे अगर देखे तो अमित कुमार जो की मशहूर गायक अभिनेता  किशोर कुमार के सुपुत्र है, यूँ तो उन्होने कोई ज़्यादा काम नही किया है परंतु आज भी पिताजी के गाए हुए गानो की बदौलत अच्छी ख़ासी रायल्टी कमा रहे है, इतना ही नही आपने थोड़ा बहुत अच्छा काम करके थोड़ा नाम भी कमा लिया और आपकी संतान निकम्मी भी निकली तो भी कुछ ना कुछ तो कमा ही लेगी, उदाहरण अभिषेक बच्चन, उदय चोपड़ा, तुषार कपूर, इत्यादि |

अब इतनी बात चली ही है तो रायल्टी खाने के नाम पे देश मे नंबर 1 परिवार के बारे मे बिना कुछ बोले कैसे रहा जा सकता है, अब जब यह परिवार सत्ता के गलियारे से कोसो दूर है फिर भी हमारी जिह्वा पर इनका नाम तो आ ही जाता है , आपने अब तक अनुमान लगा ही लिया होगा में किसकी बात कर रहा हूँ , जी हाँ ठीक समझे, हमारा "गाँधी" परिवार, 
भाई यह परिवार तो रायल्टी के नाम पे ना जाने क्या क्या खा चूका इस देश मे और अब भी दबे छुपे खाए जा रहा है , 
खैर छोड़िये यहा में ज़्यादा भावुक नही होना चाहता हूँ|

 "गाँधी" और "रायल्टी" से याद आया की जैसे हम तमाम धार्मिक कथाओ, व्रत की कहानियों मे सुनते है की फलाँ फलाँ देवी या देवता ने स्वप्न मे आकर अपने भक्त को कुछ आदेश दिया और आदेश ना मानने के हाल मे उसका सारा राज चौपट होने की भी चेतवानी दी| आज में ईश्वर से यही प्रार्थना करना चाहूँगा की ऐसा ही कुछ आदेश हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी भी आज की सभी पार्टी के सभी नेताओ, मंत्रियों, प्रधानमंत्री, और सभी MPs तथा  MLAs (जीते हुए और हारे हुए )को भी स्वप्न मे आके दे |

इन सभी भ्रष्ट नेताओं को स्वप्न मे बापू आके कहे की आप लोग मेरी फोटो का उपयोग सालो से कर रहे हो, इसके एवज मे रायल्टी के नाम पे एक फूटी कौड़ी तक नही दी है आज तक तुमने, सबसे पहले तो मेरी फोटो मुझसे बगैर पूछे "रुपये"   के हर नोट पर छापी गयी फिर ऐसे लाखो करोड़ो के नोट तुम लोगो ने अपने जेबो मे भर लिए, फिर मेरे नाम का दुरुपयोग किया यह कह कर की गाँधी की "हरी पत्ती" के बगैर तुम कोई काम नही करोगे, मेरे नाम पर हर पार्टी के नेता ने वोट मांगे , इन सब बातो के लिए जुर्माना नही माँग रहा हूँ, में बस यह कहना चाहता हूँ की कॉपीराईट एक्ट के तहत मुझे इसकी रायल्टी मिलनी चाहिए और जैसा की इस देश मे होता आया है बाप के गुजर जाने के बाद रायल्टी उसकी संतान को मिलती है वैसे ही अब यह सारी रायल्टी की रकम तुम लोग पूरे देश मे बाँटोगे, क्योंकि क़ानूनन मे पूरे देश का बाप हूँ, में राष्ट्रपिता हूँ|




सोचिए अगर ऐसा हो जाए और यह लोग बापू की बात मान ले  और हर नोट पर छपी बापू की फोटो के लिए उस नोट की कीमत का २% भी रायल्टी के रूप मे देदे तो भी अपना देश तो सुखी हो जाए......

में तो हिसाब लगा रहा हूँ की मेरे हिस्से मे कितना आएगा, आप भी लगा लो |


--------------------------------------------------------------------------चित्र इंटरनेट के सौजन्य से

Thursday, 19 September 2013

What is Corruption ?



No no , don’t think that I am going to tell you any theory about corruption or any philosophy of corruption, “what is Corruption?” is title of a story, yes today I am going to tell you a story of a King, who was known for his excellence ruling system.

Long time ago, there was a democratic state where people themselves would like to chose who would become next king from the Royal family, there was a situation when King was no more and people have to select their next king but Prince was very immature to become king and Queen was from other state so people decided that royal family’s most loyal and most honest minister should be crowned as king, and they did.

King was ruling the state under the guidance of Queen; meanwhile Prince was becoming young and playful, he was popular amongst other loyal friends of Royal family.
Everything was going fine, but suddenly there was a massive chaos in the state about corruption and scams. Everywhere people were saying that Corruption is increasing day by day and everywhere it is causing problem for common man.
One day King held a meeting with all courtiers, discussed with them that people are crying about corruption, people are saying that they see everywhere corruption, I haven’t seen yet, have you seen ever? If anybody of you has seen corruption then tell me, how it looks like? Is it a worm, virus or a bacteria or it is something sent by our enemy states?
All courtiers said in one voice, “my lord, when it is not visible to you then how we can see it?”
King said, “No, it’s not like that, sometimes something which is not visible to me, you might see, such as I don’t see any nightmare but you must have seen.”

Courtiers said, “Yes we see nightmares but that is all about dreams, here it is reality sir.”

King said, “all right then, go and search for Corruption in whole state, if you find somewhere then bring a sample for me, I want to see how it looks like.”

Then one Minister said, “Sir, we will not be able to see corruption, we heard that it is very small and you know that we all are working under Queen’s big umbrella, and her personality is so huge that we are used to see huge things only and we can not see small things.”

Then another minister interrupted, “by chance if corruption comes in front of us even then we will see only madam’s image in it, we could not see anything else.”

one of the courtier said that he knows the solution, he said, “sir, I know there is a species called CBI in our state, they are able to find such small things, they are expert so I request you to invite them and ask them to find CORRUPTION.”

King did the same, he appointed 5 people from that special tribe called CBI, he asked them to find out about corruption and scam, and if they find it then bring a sample to court room. CBI people started finding the desired thing; they kept for searching for 2 months and then returned to King.

King asked them, “Experts, have you finished your enquiry?”
“Yes, sir!”
“Did you find corruption in our state?”
“Yes, we found lots of CORRUPTION in your state.”
King extended his palm towards them and asked, “Give me a little bit, let’s see, how it looks like?”
Experts said, “sir, you can not hold it in your hands, it is not substance, it is Imperceptible, inapprehensible and supersensible, but it is omnipresent, which can not be seen, and not be touched you can only feel it, smell it.”

After hearing these many big words for corruption, king lost in his thoughts for some time and came back to experts, “you said it is omnipresent and impalpable, but these are qualities of god, so you mean corruption is god?”

“Yes sir, now corruption has become god for many people in your state.”

Then a courtier asked “but where it is, how it smells like?”

Experts replied, “it is everywhere, it is in this building, on the roads, gardens of your state, it is in bridges, it is in schools, in offices, in coal mines, in commonwealth games grounds, in railways, in administration, it is even in weapons, in the chair of queen, PM and you all courtiers it is also in shirt of the King.”

Is it in my shirt?? Where? King swiftly jumped out from his chair and stripped in the front of all courtiers.

Experts covered the king with a shawl and said,
“Yes sir, it is in your shirt, last time when you gave contract for all your dresses then the bill which was generated and presented in court was fake bill with 10 times increased price value. There are mediators involved in your government, they mostly eat money in between, and there is corruption in all your administration.”

King was very worried, he asked to experts about the remedy of this disease, can it be cured?

Experts said, “absolutely sir, it can be cured, you just need to change the system, you have to eliminate the opportunities of corruption, you have to speak against it sir.”
“what? I have to speak ? no no, I cant do that, madam will punish me.” King said.

Then Experts explained him that he has to speak to madam and not to the public, so King was ready to talk to madam.
you said there are opportunities of corruption everywhere, how it is ? I cant see it.” King asked to Experts.
“sir, there are opportunities for example, if there are contracts then contractors and if there are contractors so there is bribe for bureaucrats in the same way if there are big projects under government then there is opportunity for the concerned ministry.”
King said to them “okay you submit your report to PMO, we will review and discuss in our ministerial meetings”.

King discussed the same with Queen Madam, madam was also worried that how to eliminate this corruption, people will not believe in royal family if they were unable to remove this bug.

Queen asked to her most qualified law makers on this situation, how to deal with it? People said,” madam, do not worry, people are used to of it now, they know that there is corruption, and it is part of their life now, so we should not worry, burn the CBI report and files. No one will ask what happened, we will say that corruption is like some black magic and it is imaginary.”

Other courtiers also said that to change the system is not possible it would be a new problem, everything will be turned down, all arrangements will be disturbed, we need such solution that we don’t need to change anything and corruption also can be removed.
Queen reciprocated the concern, “yes, I too wanted to find such solution, our ancestors knew some black magic to eliminate any problem, that is why they could rule this state for so long but what I do now?”



And here comes the master piece….

One of her family friend said “madam, we should do the same trick, what your ancestors used to perform, we should show the huge rich-poor gap to people, we should show sympathy to one specific group of people who are expanding day by day, we should declare them special tribe and we should feed them, give them land and security but not education and job, the other tribes will be jealous and instead of asking their right from us they will fight to the special tribe and all these fool people will fight each other and forget about CORRUPTION. This is the trick all your royal family used to perform, they learnt it from previous emperor, who did the same with this whole Ireland and divided it into so many small states.”
Queen was impressed with this solution, some courtiers objected then queen showed them the corruption report and threatened them that “CBI Experts” will find out more about you if you do not agree with me.
All courtiers agreed to madam, and they did what madam said.


Then once again the Royal family showed the Black Magic which is also called secularism, and the people of that state can be seen fighting everyday, they fight with each other, burn homes of each other, they abuse each other, they do not bother if they are unemployed, if they are uneducated, if they are hungry, but since their tribe is special, they will fight for it and here Royal family are having worry free and lavish dinner everyday which is cooked in the fire generated when these innocence and ignorant people torch each other's homes.

I am hopeful that One day this black magic will be exposed, and people will understand that fighting with each other is not the solution, but we have to fight against the hunger, unemployment, poverty and illiteracy.


Note: 
यह कहानी भारत की वर्तमान परिस्थितीयों से तथा श्री हरिशंकर परसाई जी की हिन्दी रचना "सदाचार का तावीज़" से प्रेरित है|
                                                                                                                                           

                                                                                                               Images Sourced from Internet