Tuesday, 11 August 2015

ड्रोन इन इंडिया

इस वक़्त जबकि आप यह लेख पढ़ रहे है दुनिया के किसी हिस्से में कोई ड्रोन किसी देश के सिपाहियों की जासूसी कर रहा होगा। या  किसी सुन्दर से द्वीप पर सूर्यास्त का चित्र ले रहा होगा या फिर किसी की टेबल पर कोई ड्रोन बियर की बोतल सर्व कर रहा होगा। यह भी हो सकता है की कोई ड्रोन किसी किशोर बालक का भेजा हुआ लाल गुलाब बाजू वाली बिल्डिंग की बालकनी में खड़ी किशोरी बाला के हाथो में  पंहुचा रहा होगा। बहुत कुछ हो रहा होगा और बहुत कुछ हो सकता है इस बारे में खोज चल रही होगी।

आगे बढ़ने से पहले एक बात साफ़ साफ़ बता दूँ की मैं यहाँ महाभारत के आचार्य द्रोण की बात नहीं कर रहा हूँ और न ही २००८ में आयी इसी नाम की एक शताब्दी की सबसे घटिया फिल्म की बात कर रहा हूँ ( आधे से ज्यादा लोग तो जानते भी नहीं होंगे की द्रोणा नाम की कोई फिल्म आयी थी। )

दर-असल मैं बात कर रहा हूँ रिमोट से चलने वाले हेलीकॉप्टरनुमा अतिबुद्धिमान यन्त्र की जिसे ड्रोन कहा जाता है। जी हाँ वही जो आपने "IIN" के विज्ञापन में देखा था।


टेक्नोलॉजी से हमारे जीवन में कईं क्रांतिकारी परिवर्तन हुए है। ज्यादा कुछ नहीं तो एक स्मार्ट फ़ोन को ही ले लीजिये फ़ोन न हुआ मुआ हमारे जीवन का रिमोट कंट्रोल हो गया।

ड्रोन भी बस इसी तरह से लोगो के जीवन में क्रांतिकारी बदलाओ लाने की क्षमता रखता है। आपने खबर में पढ़ा सुना ही होगा की ऑनलाइन शॉपिंग की सबसे बड़ी वेबसाइट अमेज़न ने अपने उत्पादों की डेलिवरी ड्रोन से करवाने की सफल टेस्टिंग की है। अब कोई भी सामान इसके ज़रिये मंगवाया / भिजवाया जा सकता है। है न कमाल की चीज। अब सोचिये की अगर ड्रोन का इस्तेमाल हमारे देश में धड़ल्ले से शुरू हो जाये तो भला क्या क्या हो सकता है ? सोंचिये।

चलिए आपको कल्पनाओ की उड़ान में ड्रोन की उड़ान से अवगत कराते है।

अब सोनू की मम्मी चिल्ला चिल्ला के सोनू को यह नहीं बोलती की जा बेटा ५ रुपये का धनिया मिर्ची ले आ। बलकि अब  वो ड्रोन के पंजो में ५ का सिक्का फंसाती है और सब्जी वाले के ठेले के कोआर्डिनेट सेट करके भेज देती है। २ मिनट में उधर से घुन घुन करता हुआ ड्रोन धनिया मिर्ची लेके हाजिर हो जाता है ।

पोर्न के बैन होने से बोखलाए लोंडे अब ड्रोन को खुला छोड़ देते है और बिल्डिंग दर बिल्डिंग तांका  झांकी करके किसी के बैडरूम से लाइव स्ट्रीमिंग देखते है।

अपने बंटी, रिंकू, बिट्टू और सोनू की गैंग जब भी क्रिकेट खेलती है और हरे रंग की कॉस्को की टेनिस बाल बड़ी बड़ी हरी झाड़ियों में जब खो जाती है तो ड्रोन की मदद से वो तुरंत उसे ढूंढ लाते है। इतना ही नहीं जब सोनू सिक्सर मार के गेंद को खडूस माथुर अंकल की बालकनी में पहुंचा देता है तब भी ड्रोन जाके गेंद को उठा लाता है।

मेरा बॉस अब एक मच्छर जितना बड़ा ड्रोन अपने केबिन से छोड़ता है और पता लगा लेता है की कौन काम कर रहा है और कौन सोशल नेटवर्किंग कर रहा है।

यु. पी में लोगो की जान को अब कम ख़तरा रहता है। बिजली के तारो पे बंगी टांगने का काम अब ड्रोन करने लगे है और इतना ही नहीं जब भी उड़न दस्ते आने वाले होते है ड्रोन आप ही तारो से बंगी  निकाल देते है।

जेठालाल अब सूरज को पानी देने बाहर नहीं जाता वो घर में, बाथरूम में या बैडरूम में बैठे बैठे ड्रोन की मदद से ही बबीता जी के दर्शन कर लेता है।

इधर हामिद ईद के मेले में से अपनी दादी के लिए चिमटा नहीं एक ड्रोन खरीदना चाहता है।

और अब बिजिली के तारो पर, नीम और पीपल के बड़े पेड़ो पर पतंगे उलझी हुयी नहीं मिलती, मिलते है तो फंसे हुए, भटके हुए, बिना बैटरी के बेजान ड्रोन्स।


चलिए  कल्पनाओ से बाहर आते है।


तो देखा आपने किस तरह से ड्रोन हमारे जीवन के दरवाजे पर क्रांतिकारी बदलाओ की दस्तक दे रहे है। हंसी मजाक की बात छोड़ भी दें तो ड्रोन वाकई में इंसानी जीवन को एक बेहतर दिशा में ले जाने में सक्षम है।

आज वैज्ञानिक इस विषय पर इतना शोध कर रहे है की आने वाले समय में ड्रोन हर आकार-प्रकार और शकल सूरत में हमारे आस पास घुन्न घुन्न करते फिरेंगे।

नमूने के तौर पर जटिल शल्य क्रिया (मेडिकल ऑपरेशन ), बड़ी छोटी पाइप लाइन की मरम्मत, खेतो में सिंचाई-बुवाई, तबेलों में जानवरो की देखरेख, जंग के मैदान और पहाड़ी गाँवो में दवाईयां पहुँचाने से लेकर कटरीना - रणबीर के हॉलिडे के सीक्रेट फोटो लेने तक के सारे काम ड्रोन करेगा। 

दूसरा पहलू यह भी है की आपकी हर एक्शन, हर बात, हर शब्द कही न कहीं रिकॉर्ड हो रहा होगा, कोई छोटा मोटा ड्रोन सदैव आपकी निगरानी कर रहा होगा और यही डेटा और इनफार्मेशन सदा सदा के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध करवा रहा होगा। कोई चोर अपने टारगेट घरो की अच्छे से पहचान कर पायेगा। "एम एम एस कांड" अब ड्रोन वीडियो कांड बन के वायरल होने लगेंगे। सुरक्षा के लिहाज से आपको सदैव चौकन्ना रहना पड़ेगा।इत्यादि कईं प्रकार की तमाम वो हरकते जो नहीं होना चाहिए आसानी से की जा सकेंगी।

किन्तु जैसे बचपन से  हम हिन्दी के पेपर में "विज्ञान - वरदान या अभिशाप" पर निबंध लिखते आये है वैसे ही "ड्रोन- वरदान या अभिशाप" पर निबंध लिखा करेंगे। कहने का तात्पर्य यह है की जहाँ देव है वहां दानव है, जहाँ बुद्धि है वहीं कुबुद्धि है और जो एक पानी की बून्द सीपी का मोती बन सकती है वही पानी की बून्द किसी जहाज़ को डूबा सकती है। टेक्नोलॉजी और विज्ञान तो दिन प्रतिदिन उन्नत होते जा रहे है।इंसानी जीवन को सुखद और समृद्ध बनाने के लिए निरंतर नए आविष्कार आते जा रहे है। परन्तु इन्हे इस्तेमाल करने की नियत/इरादे/इंटेंशन्स में कोई बदलाओ नहीं आ रहा है। जब नियत बदलेगी तभी सभ्यता समृद्ध होगी। सब कुछ आप और हम पर निर्भर करता है।इसीलिए आने वाली पीढ़ी की नियत की प्रोग्रामिंग अच्छे से करे और एक उन्नत और समृद्ध भविष्य की कामना करे।



अधिक सुचना स्रौत: http://news.sap.com/drones-lots-of-buzz-and-a-little-bit-of-sting/
चित्र : हमेशा की तरह गूगल के सौजन्य से







Tuesday, 14 July 2015

ऑनलाइन शॉपिंग के नुकसान


भारत में ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड बड़े जोरो शोरो से चल रहा है। सर की टोपी से लेकर पैरो की जुराबों तक, छोटे से फ़ोन से लेकर बड़े से मकान तक सब कुछ ऑनलाइन बिक रहा है। हमारी युवा पीढ़ी तो सबकुछ ऑनलाइन ही कर रही है।

वैसे तो मैं भी इसी पीढ़ी का हिस्सा हूँ परन्तु मेरी पढ़ाई लिखाई इस ऑनलाइन क्रांति से थोड़ा पहले ही खत्म हो गयी थी, इसलिए मैं अपनी स्कूल/कॉलेज के जीवन में इस क्रांति से अछूता रह गया।अभी तो जितना हो सके मैं भी  शॉपिंग ऑनलाइन ही करता हूँ फिर चाहे कच्छा खरीदना हो या जूते या फ़ोन।

अभी अभी हमारे प्रधानमंत्री जी ने भी डिजिटल इंडिया के नाम से आंदोलन छेड़ा है तो आने वाले समय में ऑनलाइन काम-काज बढ़ेगा। लोग तो यहाँ तक कहते सुनते नजर आते है की अब बाज़ार बंद होने को है, दुकानो पर ताला लगने वाला है क्योंकि सब कुछ तो मोबाइल से ही खरीदा जा सकता है।
किन्तु मेरा कहना है की हम भारतीय लोग कभी इन बाज़ारो को बंद नहीं होने देंगे, चाहे कितना ही ऑनलाइन क्रांति ले आओ हमें मार्केट में जाके मोल-भाव करके सामान खरीदने से कोई नहीं रोक सकता।

मैं अपने दिल की बात बताऊ तो ऑनलाइन शॉपिंग में वो मजा नहीं है जो मजा किसी सामान को बाज़ार से खरीद के लाने में है।

किसी उत्सव की शॉपिंग हो या शॉपिंग का उत्सव, भारत की एक प्रजाति जिसे लोग मिडल क्लास कहते है सबसे आगे रहती है। हाई क्लास वाले तो भारत में शॉपिंग करते ही कहाँ है। और जब हम शॉपिंग को उत्सव की तरह मनाते है तो बाकायदा इसके लिए दिन महीना वार चौघड़िया निश्चित करके घर से निकलते है। अब अगर कोई कहे की इस उत्सव को घर बैठे मनाओ वो भी कंप्यूटर/मोबाइल के सामने बैठे बैठे तो इसमें क्या मजा है भाई ?

आईये मुद्दे की बात करते है और आपको समझाते है की बाज़ार में जाकर शॉपिंग करने के कितने फायदे है।

१. फैमिली आउटिंग:
हमारे यहाँ कईं लोगो के लिए  शॉपिंग एक फैमिली आउटिंग की तरह होती है। यहाँ शॉपिंग से मेरा मतलब मासिक राशन की शॉपिंग से भी हो सकता है जो की बिग-बाजार, रिलायंस मार्ट या डी-मार्ट से जाके की जाती है। अपने २ साल के बच्चे को शॉपिंग कार्ट में बिठा दो और कार्ट का हैंडल अपने बड़े बच्चे को पकड़ा दो।
पुरे फ्लोर पे २-३ घंटे घूम के गृहस्थी का सारा सामान लेने के बाद बच्चो को कॅश काउंटर पर पड़ी चॉकलेट दिलवा दो। शॉपिंग की शॉपिंग , आउटिंग की आउटिंग।

२. मैच मेकिंग/नैन मटक्का
बाहर जाके खरीददारी करने का दूसरा फायदा यह है की जितने भी सिंगल भाई बंधू या देवियाँ है उनको एक मौका मिल जाता है चेक आउट करने का। कहते है की नज़रे मिली और इश्क़ हो गया , किन्तु नज़रे मिलने के लिए आपको घर से बाहर निकलना होगा और उसके लिए कोई अच्छा सा काम का बहाना चाहिए।आपने फिल्मो में देखा ही होगा कितने लोगो की कहानी दुकानो पर या बाज़ार की गलियों में नैन मटक्को से ही शुरू होती है।
मैं तो कहता हूँ की कुछ फिल्मे ऐसी बननी चाहिए जिनके नाम हो, "दो दिल मिले दूकान में ", "बिल देते देते दे दिया दिल", etc etc ...



३.  "We" time for couples:
जी हाँ आज कल के कपल्स के लिए "वी टाइम" याने के दोनों को अकेले में साथ बिताने (बतियाने)का समय निकालने बहुत ही मुश्किल है। पूरा दिन तो काम काज में निकल जाता है, शाम को खा पी के टीवी देख के सो जाने में और अगले दिन से फिर वही। वीकेंड में फ्री टाइम मिलता है तो दोनों अपना अपना कोई पर्सनल काम निपटा लेते है और बाकी बचा टाइम मोबाइल या  लैपटॉप की भेंट चढ़ जाता है। ऐसे में अगर शॉपिंग भी लैपटॉप/मोबाइल से ही कर लोगे तो आपस में जान पहचान कब करोगे ?
इसके लिए जाईये कम से कम राशन तो बाहर से खरीद के लाईये, आपस में बातें करने का मौका मिलेगा, किसे क्या पसंद है जानने का मौका मिलेगा और इसी बहाने सो कॉल्ड टीम वर्क भी हो जायेगा।


४. Men will be men actions:
अब इसके लिए क्या लिखू ? आप खुद ही समझदार है। ज्यादा जानने के लिए वीडियो देखे। किन्तु फेमिनिस्ट लोगो को चेता दू की यहाँ बात का बतंगड़ न बनाये ।


तो समझे आप , भारत में दुकाने और बाज़ार इतनी आसानी से बंद नहीं होने वाले।




नोट: चित्र गूगल सर्च के सौजन्य से







Monday, 2 September 2013

भारत की न्याय प्रणाली


कुछ दीनो पहले मेने एक हिन्दी फ़िल्म देखी थी “स्पेशल 26”, जिसमे असली वाली CID के मनोज वाजपयी और लूट जाने वाले जौहरी सेठ के बीच एक संवाद है जिसमे मनोज वाजपयी कहते है की “ सेठ जी, हमारे देश मे जुर्म सोचने की सज़ा नही मिलती, जुर्म करने की मिलती है और वो भी तब जब सबूत हो”


यह संवाद सुन के मेरे मन मे आया की अगर ऐसा सच मे होता की इंसान के अपराध  सोचने भर से ही उसको पकड़ लिया जाता और सज़ा सुना दी जाती तो कैसा होता हमारा देश?

वैसे आप कहेंगे की क्या फालतू की बकवास है, ऐसा कैसे संभव हो सकता है? तो दोस्तो, ऐसा हो सकता है, सोचिए अगर हमारे यहाँ हर इंसान के पैदा होते ही उसके दीमाग मे एक चिप लोड कर दें जो की उसके सोचने समझने की प्रणाली(nervous system) को नियंत्रित करती हो, चिप के प्रोग्रामिंग IPC की धाराओं के हिसाब से इस तरह हो की अगर व्यक्ति ने सोचा की में फलाँ फलाँ व्यक्ति को मार दूँगा तो तुरंत धारा 302 वाला signal activate हो जाएगा और निकटतम पोलीस स्टेशन पर उस व्यक्ति के ID नंबर के साथ अलार्म बज जाएगा, बस पोलीस वाले अपना काम शुरू कर देंगे और अपराधी सोच वाला व्यक्ति  पुलिस  की निगरानी में आ जायेगा।
विज्ञान  के इस युग मे सब कुछ संभव है, तो ऐसा भी हो सकता है एक दिन.
तो पाठकों (readers)  सोचिए की अगर ऐसा हो जाए, की इंसान के अपराध सोचने भर से ही उसके मोबाइल फोन पर उसको  चेतावनी मिल जाए की “एक बार अपराध सोच तो लिया है अब दोबारा से मत सोचना”. ऐसे मे हमारे देश मे बढ़ते हुए कितने अपराध नियंत्रित हो जाएँगे?

किंतु एक समस्या भी है,  कई  सारे निर्दोष लोग  बे-वजह फँस जाएँगे, जो बेचारे सिर्फ़ अपने दिल की खुशी के लिए किसी अपराध के बारे मे सोचते है, करते कभी नही,, जैसे आज के परिद्रश्य(Situation) की बात करे और  ऐसी प्रणाली प्रभावी हो जाए तो देश की आधी से ज़्यादा जनसंख्या “गाँधी” परिवार के विरुद्ध  "सोचने" के अपराध मे जेल मे होगी, ये ही नही, हमारे देश के कई मेधावी (Brilliant) अभियांत्रिकी (Engineering) स्वस्थ युवा पुरुष की श्रेणी मे आने वाले छात्र जो बेचारे सिर्फ़ सोच ही सकते है, वो सबसे ख़तरनाक धारा के लपेटे मे आ जाएँगे ( धारा 376).

इस अपराध सूचक प्रणाली का असर सीधा हमारे देश के नागरिको की सोच पर होगा और जब सोच बदलेगी तो देश तो अपने आप बदल जाएगा| किंतु फिर एक समस्या है, ऐसे कई अपराध सूचक यंत्र तो आज भी देश मे है, आज भी  देश मे कठोर कानून व्यवस्था है। सुचना का अधिकार है, CBI है, दुनिया भर की एजेंसीज है,
परंतु जो सबसे ज़्यादा बड़े अपराधी है, हमारे नेता गण जो की अपने आप को किसी भी अपराध नियंत्रण प्रणाली से ऊपर समझते है वो यहा भी बच निकलेंगे. और दूसरी समस्या यह है की आज की हमारी पोलीस जो की अपराध “करने” वालो को ही नही पकड़ सकती, और पकड़ भी ले तो उन्हे सज़ा नही दिला सकती तो सोचिए वो पोलीस अपराध “सोचने” वालो को क्या खाक पकड़ेगी…..

अभी के ताजा उदाहरण (Delhi Gang Rape Juvenile verdict, Aasaram Bapu case)इस बात के प्रमाण है की हमारी न्याय प्रणाली कितनी खोखली है, हमारा संविधान जो की कई दुसरे देशो के संविधान का Copy Paste है कितना कमजोर है, हमारे देश में अगर ताकतवर है तो बस राजनैतिक लोग जो जब भी मन में आये तब कानून, संविधान, नीतियां बदल लेते है और सिर्फ आम आदमी के विरुद्ध इन्हें उपयोग करते है।

में आप सभी के भी विचार जानना चाहूँगा, की आज की कानून व्यवस्था हमारे देश के अपराधिक मनोविज्ञान से निपटने में कारगर है ? हमारा देश जो की प्रजातान्त्रिक देश है क्या कानून बनाने के समय हमारी राय नहीं ली जानी चाहिए ?

Friday, 14 June 2013

हिन्दुस्तान मे गूगल ग्लास

 इस संसार मे भगवान के अलावा एक और चीज़ है जो की सर्वव्यापक है, कण कण मे है, हर एक इंसान के विश्वास मे है, यहाँ तक की नास्तीको के दिलो मे भी उसीका राज है और  वो है “गूगल”.

गूगल सिर्फ़ एक कंपनी का नाम नही है बल्कि यह इस पापी दुनिया मे कुछ लोगो के लिए जीने का एक सहारा है….

इस मायावी संसार मे कई सारे अत्याचार हम निर्दोष प्राणियों पे होते है जिनसे बचाने मे गूगल की जो सहायता हमे मिलती है वो नज़रअंदाज नही की जा सकती है, कभी कभी तो मुझे लगता है की भगवान विष्णु का दसवां अवतार गूगल के रूप मे ही हुआ है|

हम आय टी प्रोफेशनल्स की प्रजाति मे कई लोग ऐसे होंगे जिनके लिए गूगल के बिना दिन गुज़ारना मानो किसी महिला के लिए बिना कोई सीरियल देखे दिन गुजारने के बराबर है|
चलिए गूगल की महिमा को आगे बढ़ाते हुए अब बात करते है गूगल के नये आविष्कार “गूगल ग्लास” की। 
अभी यह नया शिगूफ़ा गूगल ने बाज़ार मे पूरी तरह से उतारा भी नही की इस पर सारी दुनिया मे बहस शुरू हो गयी इसके नुकसान और फायदो के बारे मे… खैर छोड़िये यह तो हमारी दुनिया की फ़ितरत है|









आपको बता देना उचित होगा की गूगल ग्लास एक ऐसा औज़ार है जो की चश्मे के रूप मे एक चलता फिरता, अच्छे से काम करता कंप्यूटर, वीडियो रेकॉर्डर, कॅमरा, दूरबीन और भी ना जाने क्या क्या है …..
कहते है की इसे लगा के देखने से सामने जो नज़र आता है उसकी सारी जानकारी भी तुरंत डिस्‍प्‍ले हो जाती है और आप चाहे जिसका फोटो खींच सकते है उसकी रेकॉर्डिंग कर सकते है बिना सामने वाले को पता पड़े.....वाह भाई कमाल की चीज़ है, पर ज़रा गौर फरमाने की बात यह है की अगर यह चश्मा हिन्दुस्तान मे लॉंच हुआ तो इसके क्या क्या नफे-नुकसान होंगे सोचा है आपने? 
आईए आप और हम मिलके इन बातो पे चर्चा करते है दुनिया वाले तो कर ही रहे है फिर हम क्यों पीछे रहे|

सबसे बड़ा नुकसान तो बेचारे हमारे लैला-मजनुओ को होगा जो यहाँ वहाँ गाना गाते फिरते है “खुल्लम-खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनो”, पता नही कब, कहाँ, कौन रेकॉर्डिंग करके घर पहुचा दे, या “गूगल” के ही एक और औजार "यू ट्यूब" पे डाल दे। 


हिन्दुस्तान मे कुछ कुछ जगहो पे बड़े बड़े साइन बोर्ड्स पे छोटे छोटे अल्फाज़ो मे लिखा होता है “ यहा फोटोग्रफी करना सख़्त मना है”. गूगल ग्लास के आने के बाद “सख़्त” थोड़ा नर्म हो जाएगा, और अगर हमारे सेक्यूरिटी वाले संतरी लोगो को इस अनोखे चश्मे के बारे मे जैसे तैसे थोडा बहुत  पता भी होगा तो आपके बॅग्स, पर्स, पॉकेट्स के अलावा आपका चश्मा भी उतरवा लेंगे।  ऐसे मे बेचारे सीधे सादे से दिखने वाले  नज़र के चश्मे पहनने वाले लोगो को कितनी मुसीबतो का सामना करना पड़ेगा सोचिए जरा । 

जैसा की आप  जानते है यह चश्मा सामने वाले की सारी डीटेल्स डिसप्ले कर देता है, सोचिए हमारे रंगीन मिज़ाज प्यारेलाल साहिब अपनी ऑफीस वाली माशुका के साथ कॉफी पी रहे है, और कॉफी शॉप के नज़दीक से   भाभी जी  याने प्यारेलाल साहिब की बीवी गुजर रही हो और अचानक उनके चश्मे की स्क्रीन पे मेसेज आता है “Pyarelal is having coffee with Teena"……आगे का अंजाम तो आप खुद ही सोच सकते है, समझदार है|



सिर्फ़ प्यारेलाल ही नही किसी भी साधारण स्वस्थ पुरुष के साथ यह दुर्घटना घट सकती है, फर्ज़ कीजिए आपके चश्मे की रेकॉर्डिंग ऑन है और आपको पता नही है, आप मज़े से अपने आसपास के रंगीन नज़ारो को घूर घूर के देखे जा रहे है, पूरे स्वाद के साथ, चटखारे लेके, शाम को आपके चश्मे की वही रेकॉर्डिंग आपकी बीवी या माशुका देखती है फिर आपके चटखारो की आपको क्या कीमत चुकानी होगी अंदाज़ा लगाना ज्यादा मुश्किल नही है। 


यह भी हो सकता है की आप अपनी गर्ल फ्रेंड या बीवी के साथ मार्केट मे घूम रहे है और चश्मे की स्क्रीन पे सारे मार्केट की दुकानो पे जो “सेल” या ऑफर चल रहा है उसकी डीटेल्स धड़ा-धड़ आ रही है और  इधर  आपका क्रेडिट कार्ड धड़ा-धड़ स्वाइप हो रहा है..। 


कल्पना कीजिए आप अपनी गाड़ी से कही जा रहे है और अगले चौराहे पे ट्रॅफिक हवलदार आपको रोकता है और बदक़िस्मती से आपके पास गाड़ी का कोई ज़रूरी कागज नही है और हवलदार चढ़ बैठा, घबराने की कोई बात नही, आपने गूगल का जादुई चश्मा पहना है और रेकॉर्डिंग ऑन है, बस हवलदार साहिब मोल-भाव करना शुरू करते है, आप रेकॉर्डिंग को मोबाइल मे ट्रान्स्फर करके साहिब को दिखाते है और हवलदार जी  से सलामी ठुकवा के निकल पड़ते है, मुमकिन है साहब | 

ऐसे ही बेचारे ट्रॅफिक हवलदार, सरकारी ऑफिसर्स, क्लर्क्स, पोलीस वाले भैया लोग सब के सब हमारे चश्मे वाले भाइयों से कितना डरने लगेंगे सोचिए ज़रा…


शायद भ्रष्टाचार रूपी राक्षस से लड़ने मे भी गूगल का यह औजार हथियार बनके हमारे काम आजाए, क्या पता हमारे देश की एकॉनमी थोड़ी सुधार जाए इसीलिए तो मेने पहले ही कहा था की गूगल ही वो सूपर नॅचुरल शक्ति है जिसको हम भगवान के अवतार के रूप मे देख सकते है……

अब आप क्या सोचते है इस जादुई चश्मे के बारे मे???